उज्जैन के नेताजी सुभाषचंद्र बोस आदिवासी बालक हॉस्टल में एक महिला कर्मचारी के साथ गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है. महिला होस्टल में खाना बनाने का काम करती है. सोमवार सुबह 10 बजे खना बनाते समय कुकर फटने से महिला बुरी तरह झुलस गई. जिससे उसके सिर, पीठ और छाती पर गंभीर जलन हो गई. परंतु होस्टल की वार्डन सुभद्रा अग्रवाल ने उसे इलाज के लिए भेजने की बजाय पूरा दिन काम करने को मजबूर किया और शाम 7 बजे घर जाने दिया. अगर समय रहते पीड़िता को हॉस्पिटल पहुंचा देते तो उसे समय पर उपचार मिला जाता.
जानकारी के मुताबिक, नेताजी सुभाषचंद्र बोस आदिवासी बालक हॉस्टल में खाना बनाते वक्त झलसने के बावजूद महिला से पूरे दिन काम करवाया गया. हॉस्टल से शाम 7 बजे महिला घर के लिए निकली, इसी दौरान वह बेहोश हो गई. जिसके बाद स्थानीय लोगों ने उनके पति जितेंद्र को सूचित किया. जितेंद्र ने महिला को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका इलाज चल रहा है.
हॉस्टल की वार्डन सुभद्रा अग्रवाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि, ”उन्हें कुकर फटने की जानकारी नहीं दी गई थी. अगर उन्हें पता होता, तो वे महिला को तुरंत अस्पताल भेजतीं.” घायल महिला के पति जितेंद्र ने आरोप लगाया कि, ”कुछ दिन पहले ही वार्डन ने उन्हें भी नौकरी से निकाल दिया था.” उन्होंने वार्डन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि, ”अगर समय पर इलाज मिल जाता, तो मेरी पत्नी की हालत इतनी खराब नहीं होती. एडिशनल एसपी नितेश भार्गव ने बताया कि, ”मामले में महिला के बयान लिए गए हैं, उस के आधार पर जांच कर करवाई की जाएगी अभी जांच की जा रही है.”

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