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तिरुमला में केश दान का नया कीर्तिमान, 27 दिनों में 12.43 लाख श्रद्धालुओं ने अर्पित किए बाल!

तिरुपति। आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, तिरुमला में श्रद्धालुओं की आस्था ने एक नया इतिहास रच दिया है। मई 2026 में केश दान (मुंडन) करने वाले भक्तों की संख्या ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के अनुसार, 1 से 27 मई के बीच 12.43 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में अपने केश अर्पित किए।

दो वर्षों के रिकॉर्ड पीछे छूटे

टीटीडी के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में केश दान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक रही। इससे पहले मई 2024 में लगभग 10.65 लाख और मई 2025 में 10.18 लाख भक्तों ने मुंडन कराया था। इस बार महज 27 दिनों में ही यह आंकड़ा 12 लाख के पार पहुंच गया, जो तिरुमला के इतिहास में एक नया कीर्तिमान माना जा रहा है।

केश दान से बढ़ेगी मंदिर की आय

भक्तों द्वारा अर्पित किए गए बाल मंदिर प्रशासन के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। टीटीडी ने चालू वित्त वर्ष में मानव केश की ई-नीलामी से करीब 176 करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया है। पिछले वित्त वर्ष में यह आय लगभग 150 करोड़ रुपये रही थी। इस प्रकार मंदिर की आय में करीब 26 करोड़ रुपये की वृद्धि होने की संभावना है।

283 टन बालों की वैश्विक ई-नीलामी

मंदिर प्रशासन ने अब तक एकत्र हुए 2.83 लाख किलोग्राम (283 टन) मानव बालों की वैश्विक ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन बालों की काफी मांग रहती है। छोटे बालों का मूल्य लगभग 135 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है, जबकि लंबे और प्रीमियम गुणवत्ता वाले बालों की कीमत 20 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है।

एक दिन में बना सबसे बड़ा रिकॉर्ड

टीटीडी के अनुसार, गर्मी की छुट्टियों और धार्मिक आयोजनों के कारण इस बार तिरुमला में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। 23 मई 2026 को एक ही दिन में 57 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मुंडन कराया, जो तिरुमला में एक दिन में सबसे अधिक केश दान का नया रिकॉर्ड बन गया।

आस्था और समर्पण का अनूठा उदाहरण

तिरुमला में केश दान की परंपरा सदियों पुरानी है। श्रद्धालु इसे भगवान वेंकटेश्वर के प्रति समर्पण, कृतज्ञता और श्रद्धा का प्रतीक मानते हैं। मई 2026 में दर्ज हुई रिकॉर्ड संख्या यह दर्शाती है कि देश-विदेश से आने वाले भक्तों की आस्था लगातार बढ़ रही है और तिरुमला आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।