इंदौर। इंदौर जिला न्यायालय परिसर में बार एसोसिएशन के औचक निरीक्षण के दौरान एक संदिग्ध युवक को फर्जी वकील होने के संदेह में पकड़ा गया। पहचान संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाने पर अभिभाषक संघ ने उसे एमजी रोड थाना पुलिस के हवाले कर दिया, जहां पुलिस ने पूछताछ शुरू कर मामले की जांच तेज कर दी है।
जानकारी के अनुसार, नवनिर्वाचित इंदौर अभिभाषक संघ के अध्यक्ष राकेश पाल और कार्यकारिणी सदस्य कोर्ट परिसर में जूनियर वकीलों एवं ड्रेस कोड की जांच कर रहे थे। इसी दौरान कोर्ट रूम नंबर-44 के पास खड़े एक युवक पर उन्हें संदेह हुआ। पूछताछ में उसने अपना नाम धर्मेंद्र राठौर बताया।
पहचान साबित नहीं कर सका युवक
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पाल ने बताया कि पूछताछ के दौरान धर्मेंद्र राठौर अपनी पहचान से जुड़े कोई संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया। उसने दावा किया कि वह एक वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ मुंशी के रूप में कार्य करता है, लेकिन इस दावे के समर्थन में भी कोई अधिकृत दस्तावेज नहीं दिखा सका।
पुलिस को सौंपा मोबाइल, जांच शुरू
बार एसोसिएशन के अनुसार, न्यायालय परिसर में निर्धारित ड्रेस कोड का पालन केवल अधिकृत अधिवक्ताओं को ही करने की अनुमति है, जबकि लॉ स्टूडेंट्स के लिए अलग नियम लागू हैं। दस्तावेजों के अभाव में धर्मेंद्र राठौर को एमजी रोड थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। उसका मोबाइल फोन भी जांच के लिए पुलिस को सौंपा गया है।
फर्जी वकील या लॉ स्टूडेंट? जांच जारी
अभिभाषक संघ ने पुलिस को लिखित आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में अधिवक्ता, लॉ स्टूडेंट या किसी वकील का मुंशी है, अथवा फर्जी पहचान के साथ कोर्ट परिसर में सक्रिय था। फिलहाल पुलिस उसके दस्तावेजों और मोबाइल डेटा की जांच कर आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

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