मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट को लेकर जारी राजनीतिक विवाद अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस लगातार चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के एक बयान ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में कई संवैधानिक संस्थाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि “इस चोरी में सभी शामिल हैं। राज्य सरकार, केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और मुझे कहना पड़ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट भी इस चोरी में शामिल है।” साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस फैसले का विरोध जारी रखेगी और मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा भेजने के लिए संघर्ष करेगी।
भाजपा ने साधा निशाना
दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने बयान को न्यायपालिका का अपमान बताते हुए कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत पर इस तरह की टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की राजनीति कर रही है।
सारंग ने कहा कि पहले कांग्रेस चुनाव आयोग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर सवाल उठाती रही, जबकि अब सर्वोच्च न्यायालय को भी विवाद में घसीटा जा रहा है। उन्होंने न्यायपालिका से मामले का संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई करने की मांग की।
रामेश्वर शर्मा ने भी जताई आपत्ति
वहीं भोपाल के हुजूर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी दिग्विजय सिंह के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ राजनेता से ऐसी भाषा की अपेक्षा नहीं की जाती। शर्मा ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए मामले की जांच होनी चाहिए और आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए।
राज्यसभा चुनाव से जुड़ा है पूरा विवाद
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस का आरोप है कि उसके प्रत्याशी का नामांकन अनुचित तरीके से निरस्त किया गया, जबकि भाजपा चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह वैधानिक और नियमसम्मत बता रही है।
दिग्विजय सिंह के बयान के बाद यह मामला अब केवल चुनावी विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर भी बहस तेज हो गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

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