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नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटते ही फूटा गुस्सा, दतिया में बवाल और हाईवे जाम!

दतिया (मध्य प्रदेश)। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी द्वारा उम्मीदवार बदलने के फैसले ने जिले की राजनीति में उबाल ला दिया है। पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से नाराज समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार शाम दतिया-झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम कर दिया। विरोध प्रदर्शन पूरी रात जारी रहा और शनिवार सुबह पुलिस को जाम हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प, पथराव और अफरातफरी का माहौल देखने को मिला।

टिकट कटते ही सड़कों पर उतरे समर्थक

भाजपा द्वारा आशुतोष तिवारी को दतिया उपचुनाव का प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद सैकड़ों कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने दतिया-झांसी हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया और रातभर “डॉ. नरोत्तम मिश्रा जिंदाबाद” तथा “टिकट वापस लो” जैसे नारे लगाते रहे।

समर्थकों का कहना था कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा दतिया की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा हैं और पार्टी का फैसला कार्यकर्ताओं की भावनाओं के विपरीत है। उनका स्पष्ट कहना था कि जब तक टिकट बदलने का निर्णय वापस नहीं लिया जाएगा, आंदोलन जारी रहेगा।

पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ा तनाव

शनिवार तड़के भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और प्रदर्शनकारियों को समझाकर सड़क खाली कराने का प्रयास किया। प्रशासन के अनुसार कई दौर की बातचीत के बावजूद जब प्रदर्शनकारी नहीं माने, तब भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए।

इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। हालात तब और बिगड़ गए जब कुछ उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, जिसके बाद घटनास्थल पर कुछ समय के लिए अफरातफरी मच गई।

एसपी बोले—लाठीचार्ज नहीं, केवल आंसू गैस का इस्तेमाल

जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने किसी भी प्रकार का लाठीचार्ज नहीं किया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। करीब दो घंटे की कार्रवाई के बाद हाईवे से जाम हटाकर यातायात बहाल कर दिया गया और स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।

15 से 20 किलोमीटर लंबा जाम, एंबुलेंस भी फंसी

दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब 5:30 बजे शुरू हुआ चक्का जाम शनिवार सुबह लगभग 5 बजे तक जारी रहा। इस दौरान दतिया-झांसी हाईवे पर लगभग 15 से 20 किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिसमें कई बसें, निजी वाहन और एंबुलेंस तक फंस गईं।

उन्होंने बताया कि प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक हटाने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा।

पथराव में आठ पुलिसकर्मी घायल

कलेक्टर के अनुसार, पुलिस कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों ने भारी पथराव किया, जिसमें आठ पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस अधीक्षक तथा भांडेर के एसडीओपी को भी चोटें आईं।

प्रशासन का दावा है कि पुलिस ने लाठीचार्ज नहीं किया, बल्कि केवल जवानों ने लाठियां जमीन पर पटककर भीड़ को पीछे हटाया।

वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी की कोशिश

प्रशासन के मुताबिक उपद्रवियों ने प्रदर्शन के दौरान कई वाहनों को निशाना बनाया। पांच से छह ट्रकों के शीशे तोड़े गए, कुछ वाहनों को पलट दिया गया और आग लगाने का भी प्रयास किया गया। एसडीओपी की सरकारी गाड़ी का शीशा तोड़ दिया गया, जबकि एक पुलिस वाहन को भी क्षतिग्रस्त कर पलट दिया गया।

24 घंटे का अल्टीमेटम, फिर हाईवे जाम की चेतावनी

हालांकि पुलिस द्वारा जाम हटवा दिया गया है, लेकिन आंदोलनकारी अभी भी अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि वे भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को स्वीकार नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने पार्टी नेतृत्व को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि डॉ. नरोत्तम मिश्रा को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया तो वे फिर से हाईवे जाम करेंगे।

उपचुनाव से पहले भाजपा के लिए बड़ी चुनौती

दतिया उपचुनाव से ठीक पहले पार्टी के भीतर खुलकर सामने आया यह विरोध भाजपा नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन गया है। एक ओर पार्टी आशुतोष तिवारी को संगठन का मजबूत और संघनिष्ठ चेहरा बताकर चुनाव मैदान में उतार रही है, वहीं दूसरी ओर नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का आक्रोश चुनावी रणनीति को प्रभावित करता दिखाई दे रहा है।

स्थिति को देखते हुए दतिया भाजपा जिला कार्यालय के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग भी की गई है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है और स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में शांति व्यवस्था भंग करने का प्रयास हुआ तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अब सबकी नजर पार्टी नेतृत्व पर

दतिया में बढ़ता असंतोष केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला अब भाजपा संगठन के लिए भी एक अहम परीक्षा बन चुका है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस नाराजगी को कैसे संभालता है और उपचुनाव पर इसका क्या असर पड़ता है, इस पर प्रदेश की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।