उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को एक बार फिर अपने सहज और जनसंपर्क वाले अंदाज से लोगों का दिल जीत लिया। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों का जायजा लेने उज्जैन पहुंचे मुख्यमंत्री ने इस बार परंपरागत वीआईपी प्रोटोकॉल से अलग हटकर बुलेट मोटरसाइकिल पर शहर का भ्रमण किया। बिना तामझाम और लंबे काफिले के वे सीधे आम लोगों के बीच पहुंचे, दुकानदारों से बातचीत की, विकास कार्यों का निरीक्षण किया और जनता से सीधे सुझाव भी लिए।
मुख्यमंत्री का यह अलग अंदाज शहरभर में चर्चा का विषय बना रहा। जगह-जगह लोगों ने उनका फूलों की वर्षा और जय श्री महाकाल के उद्घोष के साथ स्वागत किया।
बुलेट पर सवार होकर पहुंचे विकास कार्यों के बीच
सर्किट हाउस से निकलने के बाद मुख्यमंत्री स्वयं बुलेट मोटरसाइकिल पर सवार होकर सबसे पहले फ्रीगंज ब्रिज पहुंचे। यहां उन्होंने निर्माणाधीन पुल की डिजाइन, गुणवत्ता और प्रगति का बारीकी से निरीक्षण किया। अधिकारियों से निर्माण कार्य की जानकारी ली और समयबद्ध तरीके से परियोजना पूरी करने के निर्देश दिए।
इसके बाद मुख्यमंत्री कोयला फाटक से कंठाल चौराहे तक पैदल चले। रास्ते में वे कई स्थानों पर रुके और स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों तथा राहगीरों से बातचीत कर सिंहस्थ-2028 की तैयारियों और शहर के विकास कार्यों पर उनकी राय जानी।
दुकानदारों से मुलाकात, लोगों ने किया आत्मीय स्वागत
भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री का स्वागत जगह-जगह पुष्पवर्षा, जयकारों और मिठाई खिलाकर किया गया। लोगों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाईं और विकास कार्यों को लेकर अपने सुझाव भी साझा किए।
मुख्यमंत्री ने भी बिना औपचारिकता के लोगों से आत्मीय संवाद किया और आश्वस्त किया कि सिंहस्थ-2028 को देश का सबसे भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन बनाने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
रेस्टोरेंट में बनाई गर्मागर्म जलेबियां
मुख्यमंत्री के दौरे का सबसे खास और भावुक क्षण कंठाल चौराहे स्थित प्रसिद्ध खंडेलवाल रेस्टोरेंट में देखने को मिला। यहां उन्होंने चाय का स्वाद लेने के साथ-साथ खुद कढ़ाई के सामने खड़े होकर जलेबियां भी बनाईं।
रेस्टोरेंट में मौजूद पुराने परिचितों और मित्रों से मुख्यमंत्री ने आत्मीय मुलाकात की। उन्होंने सभी से सहजता से बातचीत की और पुराने दिनों की यादें भी साझा कीं। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया।
‘उज्जैन मेरी माटी है’
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन केवल उनका राजनीतिक क्षेत्र नहीं, बल्कि उनकी जन्मभूमि और कर्मभूमि है। उन्होंने कहा,
“उज्जैन मेरी माटी है। सिंहस्थ-2028 को भव्य और दिव्य बनाने के लिए शहर में चल रहे विकास कार्यों को स्वयं जमीन पर आकर देखना जरूरी था। जनता का स्नेह और विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।”
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क चौड़ीकरण, यातायात व्यवस्था और अन्य आधारभूत परियोजनाओं को तय समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन आएंगे। ऐसे में शहर का बुनियादी ढांचा, सड़कें, यातायात और नागरिक सुविधाएं विश्वस्तरीय हों, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जनता से सीधे जुड़ने का संदेश
मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल विकास कार्यों का निरीक्षण नहीं था, बल्कि जनता से सीधे जुड़ने का भी एक प्रयास माना जा रहा है। बुलेट पर शहर की सड़कों पर निकलकर आम लोगों के बीच पहुंचने, दुकानदारों से बातचीत करने और स्वयं जलेबियां बनाने जैसे सहज क्षणों ने उनके दौरे को खास बना दिया।
उज्जैन में मुख्यमंत्री का यह अनौपचारिक अंदाज पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा और लोगों ने इसे जनसंपर्क की एक अलग मिसाल बताया।

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