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नोएडा; टूटे नाले के स्लैब ने ली युवा इंजीनियर की जान, प्राधिकरण की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल!

नोएडा। मानसून की पहली तेज बारिश के साथ ही नोएडा की बदहाल जलनिकासी व्यवस्था ने एक और परिवार की खुशियां छीन लीं। सेक्टर-58 में गुरुवार सुबह करीब 9 बजे बारिश और जलभराव के बीच ऑफिस जा रहे 27 वर्षीय युवा इंजीनियर आर्यन की नाले में गिरने से मौत हो गई। हादसे के बाद एक बार फिर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और मानसून पूर्व तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद निवासी आर्यन (27) नोएडा के चौड़ा गांव में रहकर सेक्टर-58 स्थित एक निजी कंपनी में टेक्निकल सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने हाल ही में बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी और रोज की तरह गुरुवार सुबह कार्यालय के लिए निकले थे। लेकिन रास्ते में जलभराव और टूटे हुए नाले के स्लैब ने उनकी जिंदगी छीन ली।

जलभराव में छिपा था मौत का जाल

गुरुवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश के कारण सेक्टर-58 की सड़कें घुटनों तक पानी में डूब गई थीं। सड़क और नाले की सीमा पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आर्यन सड़क पर भरे पानी से बचने के लिए नाले के ऊपर बने स्लैब पर चल रहे थे। इसी दौरान ए-3 कंपनी के सामने लगे ट्रांसफार्मर में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे तेज आवाज और चिंगारियां निकलीं। घबराहट में उनका पैर लंबे समय से टूटे पड़े स्लैब पर पड़ा और वे सीधे नाले में जा गिरे।

आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल उन्हें बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। पुलिस उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पोस्टमार्टम के बाद भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं

सेक्टर-58 थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। एहतियात के तौर पर विसरा सुरक्षित रख लिया गया है, ताकि आगे की जांच में यदि किसी अन्य कारण, जैसे करंट लगने की आशंका, की पुष्टि करनी हो तो वैज्ञानिक जांच की जा सके।

करंट लगने की आशंका भी बनी हुई

हादसे के समय जिस ट्रांसफार्मर में शॉर्ट सर्किट हुआ था, वह घटनास्थल के बेहद पास लगा हुआ था। स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्यन मुंह के बल नाले में गिरे थे और उन्हें करंट भी लग सकता है। हालांकि पुलिस ने फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।

स्थानीय लोगों का आरोप—बार-बार शिकायत के बावजूद नहीं हुई मरम्मत

स्थानीय कामगारों और निवासियों का कहना है कि जिस नाले का स्लैब टूटा हुआ था, उसकी शिकायत कई बार संबंधित विभाग से की गई थी। इसके बावजूद न तो स्लैब बदला गया और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया। बारिश के दौरान पूरा क्षेत्र पानी से भर जाता है, जिससे टूटा हिस्सा दिखाई नहीं देता और हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।

‘यह दुर्घटना नहीं, प्रशासनिक लापरवाही है’

घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि यदि समय रहते नाले की मरम्मत कर दी जाती तो एक युवा की जान बच सकती थी। लोगों ने इसे प्राकृतिक दुर्घटना नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया। उनका आरोप है कि हर वर्ष मानसून से पहले बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने रहते हैं।

हर साल होते हैं दावे, हर साल सामने आती हैं खामियां

नोएडा प्राधिकरण मानसून से पहले नालों की सफाई, टूटे स्लैब बदलने और जलभराव वाले स्थानों को सुरक्षित बनाने का दावा करता है। बावजूद इसके शहर के कई सेक्टरों में खुले नाले, क्षतिग्रस्त स्लैब और खराब जलनिकासी व्यवस्था आज भी लोगों की जान के लिए खतरा बनी हुई है। सेक्टर-58 की घटना ने इन दावों की वास्तविकता उजागर कर दी है।

युवराज हादसे से भी नहीं लिया सबक

जनवरी में सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज की कार पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई थी। उस घटना के बाद जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी और अधिकारियों ने शहरभर में खुले नालों, गड्ढों और जलभराव वाले स्थानों को सुरक्षित बनाने का आश्वासन दिया था। लेकिन ताजा हादसा बताता है कि उन निर्देशों का प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दिया।

पुलिस कर रही है जांच

कोतवाली सेक्टर-58 प्रभारी अमित कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया युवक की मौत नाले में गिरने से हुई है। अभी तक परिजनों की ओर से कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है।

सवाल जो जवाब मांगते हैं

  • यदि स्लैब लंबे समय से टूटा था तो उसकी मरम्मत क्यों नहीं हुई?
  • मानसून से पहले निरीक्षण और सुरक्षा व्यवस्था के दावे कितने प्रभावी हैं?
  • क्या इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
  • क्या हर हादसे के बाद केवल जांच समितियां बनेंगी या व्यवस्था में वास्तविक सुधार भी होगा?

एक युवा इंजीनियर की असमय मौत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रशासनिक लापरवाही केवल कागजों की गलती नहीं होती, बल्कि कई बार इसकी कीमत किसी परिवार को अपने सबसे अनमोल सदस्य को खोकर चुकानी पड़ती है।