प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग को उज्जैन के अतिरिक्त संयुक्त संचालक (एजेडी) डॉ. डीके तिवारी ने अपनी कारगुजारी से शर्मसार कर दिया। फर्जी अस्पतालों पर शिकंजा कसने के बजाय स्वास्थ्य विभाग के एजेडी डॉ. तिवारी ने फर्जी क्लीनिक में 11 साल की बच्ची दीपिका डाबी का अपेंडिक्स का ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन भी ऐसा कि उसकी मौत ही हो गई।
गिरफ्तार कर भेजा जेल
परिजनों के प्रदर्शन के बाद हुई जांच में एजेडी डॉ. तिवारी व फर्जी क्लीनिक (जनसेवा नोबल पॉली क्लीनिक) के संचालक राजेश चौहान की भूमिका संदिग्ध मिली। दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार किया और कोर्ट ने दोनों को बुधवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। वारी 2 माह बाद रिटायर्ड होने वाले थे। प्रदेश में संभवत: यह पहला मामला है, जब संयुक्त संचालक स्तर का स्वास्थ्य अधिकारी गैर-इरादतन हत्या में जेल भेजा गया।
इस घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सवालों के घेरे में ला दिया है। यह सवाल तब और भी बड़ा हो गया, जब जांच टीम ने उज्जैन में 38 अस्पतालों की जांच की। इनमें से महज 8 के पास ही लाइसेंस मिले। बाकी कागज नहीं दिखा सके। इससे साफ है, जान बचाने वाले जिम्मेदारों की मिलीभगत से फर्जी अस्पतालों में मौत का खेल खेला जा रहा है।
यह है मामला
राघवी क्षेत्र के लिल्याखेड़ी गांव की 7वीं की छात्रा दीपिका पिता मेहरबान डाबी को 9 मई को सुबह जनसेवा नोबल पॉली क्लीनिक में भर्ती कराया गया। मंछामन स्थित राजेश चौहान के फर्जी क्लीनिक में अतिरिक्त स्वास्थ्य संचालक डॉ. तिवारी ने बच्ची के अपेंडिक्स का ऑपरेशन किया। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे दूसरे अस्पताल में रेफर किया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों के हंगामे के बाद पुलिस ने चौहान और डॉ. तिवारी पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया।
ओटी भी प्रॉटोकॉल के अनुसार नहीं
स्वास्थ्य विभाग की जांच में जनसेवा नोबल पॉली क्लीनिक फर्जी निकला। उसका पंजीयन नहीं था। टीम ने पहले से सील क्लीनिक का ताला तोड़कर दोबारा जांच की। इलाज और सर्जरी से जुड़े दस्तावेज जब्त किए। इसके बाद क्लीनिक फिर से सील कर दिया गया। ऑपरेशन थियेटर भी नियमानुसार नहीं था।
कलेक्टर ने कराई जांच, 30 निकले फर्जी
बच्ची की मौत के बाद कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने जांच कराई। सीएमएचओ डॉ. अशोक कुमार पटेल ने शहर और ग्रामीण क्षेत्र में जांच अभियान शुरू करने के लिए टीमें बनाईं। शहर के आधा दर्जन अस्पतालों में डॉक्टरों की लापरवाही से मरीजों की मौत हो चुकी है। इसके लिए शहर में 5 टीमें जांच कर रही हैं। बताते हैं, शहर के 38 अस्पतालों की जांच की गई है। इनमें से 8 ही रजिस्टर्ड मिले। 30 अस्पताल अवैध तरीके से संचालित किए जा रहे हैं।

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