शिव एवं उमा का प्रकृति और पुरुष का उत्सव श्री महाकालेश्वर मंदिर में उमा-सांझी महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस बार यह महोत्सव 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। उमा-सांझी के पूजन की परंपरा प्राचीन संस्कृति पर आधारित है। पांच दिवसीय आयोजन में मंदिर के सभा मंडप में धार्मिक झांकियां तथा सांझी सजाई जाएगी। भगवान महाकाल मनमहेश रूप में कोटि तीर्थ कुंड में नौका विहार करेंगे। प्रतिदिन शाम को लोक कलाकार गीत, संगीत और नृत्य की प्रस्तुति देंगे। ग्वालियर के ढोली बुआ नारदीय संकीर्तन से भक्तों को हरि कथा सुनाएंगे।
श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिवर्ष श्राद्ध पक्ष में उमा सांझी महोत्सव मनाया जाता है। आयोजन के तहत महाकाल मंदिर के सभामंडप में संझा सजाई जाएगी। वहीं, महाकाल के आंगन में सांस्कृतिक आयोजन भी होंगे। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा इस वर्ष उमा-सांझी महोत्सव का आयोजन 28 सितंबर अश्विन कृष्ण पक्ष एकादशी से 2 अक्टूबर अश्विन शुक्ल द्वितीया तक आयोजित किया जाएगा।
इस पांच दिवसीय आयोजन में प्रतिदिन सायं-आरती के पश्चात लोक संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ ही बच्चों के लिए रंगोली और अन्य स्पधार्ओं का आयोजन होंगे, जिसके अंतर्गत रंगोली के रंग से किलाकोट, रंगमहल, शीशमहल आदि की सांझी बनाएंगे। वहीं, चार अक्टूबर को चंद्र दर्शन की द्वितीया पर उमा माता की सवारी महाकाल मंदिर से प्रारंभ होकर पंरपरागत मार्ग से शिप्रा तट तक जाएगी। शिप्रा पर संझा विसर्जन व पूजन के बाद सवारी वापस मंदिर आती है। पांच दिन तक संध्या के समय चयनित लोक कलाकारों द्वारा गायन, वादन व नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाती है।

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