विश्व भर में सबसे पहले होलिका दहन भगवान महाकाल के दरबार में होता है। मान्यताओं के अनुसार महाकाल के दरबार में होलिका दहन की तैयारी एक दिन पहले से ही कर ली जाती है और खास बात यह कि महाकाल के दरबार में होलिका दहन के लिए किसी भी प्रकार का मुहूर्त नहीं देखा जाता। ये परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। बाबा महाकाल की होली देखने के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी बताते हैं कि भगवान महाकाल को ब्रह्मांड का राजा माना जाता है। इसी वजह से सबसे पहले राजा के दरबार में सभी त्योहार सबसे पहले मनाए जाने की परंपरा है। इसलिए भगवान महाकाल के आंगन में कोई भी पर्व मनाते समय मुहूर्त नहीं देखा जाता। ये पंरपरा कई वर्षों से चली आ रही है। हर साल हजारों की संख्या में भक्त महाकाल की भक्ति में लीन होकर अबीर गुलाल के साथ होली खेलते हैं और महाकाल का आशीर्वाद लेते हैं। संध्या आरती के वक्त तो पूरा मंदिर रंगों से भर जाता है। यह खूबसूरत दृश्य देखने के लिए हर साल होली के एक दिन पहले उज्जैन पहंच आते हैं।
महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित महेश गुरु ने बताया कि महाकाल मंदिर के आंगन में 24 मार्च को गोधूलि बेला में होलिका दहन किया जाएगा। इससे पहले संध्या आरती में भगवान महाकाल के साथ जमकर होली खेली जाएगी। इस अवसर पर महाकाल के हजारों भक्त रंग और गुलाल में सराबोर नजर आएंगे। होली के इस पावन पर्व का सभी भक्त बेसब्री से इंतजार करते हैं। होली के एक दिन पहले ही महाकाल मंदिर में पुजारियों और श्रद्धालुओं द्वारा भगवान महाकाल के साथ होली खेली जाएगी। इसके बाद पुजारी मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर होलिका दहन करेंगे।

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