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उज्ज्वला योजना में कथित फर्जीवाड़े के नाम पर रिश्वत, 20 हजार लेते एडीएम कार्यालय का बाबू गिरफ्तार

उज्जैन। कलेक्ट्रेट परिसर में गुरुवार को लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एडीएम कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी रोहित गोठवाल को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। मामला प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के गैस कनेक्शन में कथित फर्जीवाड़े से जुड़ा है। कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद अब एडीएम अतेन्द्र सिंह गुर्जर की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष भरत पोरवाल ने मामले में एडीएम को भी सह-आरोपी बनाने की मांग की है।

शिकायत के बाद लोकायुक्त ने बिछाया जाल

मामला नागदा के बिरलाग्राम निवासी बृजेश विश्वकर्मा की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी मां के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत जारी गैस कनेक्शन किसी अन्य व्यक्ति को दे दिया गया था। उन्होंने इस कथित गड़बड़ी की शिकायत कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में की थी। खाद्य विभाग ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट एडीएम कार्यालय को सौंप दी थी।

आरोप है कि फाइल आगे बढ़ाने और कार्रवाई कराने के नाम पर एडीएम कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी रोहित गोठवाल रिश्वत की मांग कर रहा था। परेशान होकर बृजेश ने 29 अक्टूबर को लोकायुक्त एसपी विनोद कुमार दीक्षित से शिकायत की। शिकायत का सत्यापन करने के बाद लोकायुक्त टीम ने ट्रैप की योजना बनाई।

20 हजार रुपये लेते ही रंगे हाथों पकड़ा

गुरुवार, 5 नवंबर को लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख और डीआईजी मनोज कुमार सिंह के मार्गदर्शन में टीम ने कलेक्ट्रेट परिसर में कार्रवाई की। जैसे ही रोहित गोठवाल ने शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये लिए, टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

एडीएम की भूमिका की जांच की उठी मांग

कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद मामले ने प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है। जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष भरत पोरवाल ने लोकायुक्त की कार्रवाई को केवल एक कर्मचारी तक सीमित रखने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उज्ज्वला योजना से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच एडीएम स्तर पर हो रही थी, इसलिए संबंधित फाइल और कार्रवाई की प्रक्रिया में अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

पोरवाल ने एडीएम अतेन्द्र सिंह गुर्जर को सह-आरोपी बनाने तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) के तहत आपराधिक साजिश के पहलू की जांच की मांग की है।

हालांकि, फिलहाल इस मामले में एडीएम अतेन्द्र सिंह गुर्जर की संलिप्तता साबित नहीं हुई है। लोकायुक्त की जांच में उनकी भूमिका सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।