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खड़े हनुमान मंदिर के समर्थन में उमा भारती ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र, बोलीं- आस्था और विकास में बने संतुलन

उज्जैन। सड़क चौड़ीकरण को लेकर विवादों में आए उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर का मामला अब राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मंदिर को बचाने की दिशा में समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन धार्मिक आस्था और शहर की विरासत का सम्मान करते हुए दोनों के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए।

उमा भारती ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव के उज्जैन से जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वे शहर के धार्मिक स्थलों की गरिमा और उनके महत्व को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने भोपाल में कमलापति पार्क के पास सड़क चौड़ीकरण के दौरान मस्जिद को हटाए बिना सड़क का नक्शा बदले जाने का उदाहरण भी दिया। उनका कहना है कि उज्जैन में भी इसी तरह कोई वैकल्पिक रास्ता निकाला जा सकता है।

मंदिर हटाने की कोशिश को लेकर विवाद

उमा भारती ने कहा कि भाजपा सरकारें विकास और धार्मिक आस्था को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती हैं। ऐसे में खड़े हनुमान मंदिर को हटाने के बजाय सड़क की योजना में आवश्यक बदलाव कर श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

दरअसल, सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण की योजना पर काम चल रहा है। करीब 450 मीटर लंबे मार्ग को 9 मीटर से बढ़ाकर 15 मीटर किए जाने की योजना है। इस मार्ग पर कई धार्मिक स्थल मौजूद हैं। प्रशासन के अनुसार इनमें से अन्य धार्मिक स्थलों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने को लेकर सहमति बन चुकी है। एक गणेश मंदिर को दूसरी जगह ले जाने की प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है।

लेकिन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को लेकर मामला उलझ गया है। मंदिर से जुड़ी धार्मिक आस्था के कारण प्रतिमा को स्थानांतरित करने का मुद्दा संवेदनशील बन गया है।

प्रशासन बोला- प्रतिमा को हटाने का प्रयास नहीं हुआ

वहीं, प्रशासन ने प्रतिमा को जबरन हटाने की कोशिश किए जाने की खबरों को खारिज किया है। उज्जैन के एसडीएम एलएन गर्ग ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने के प्रयासों को लेकर भ्रामक दावे किए जा रहे हैं।

प्रशासन के मुताबिक, प्रतिमा को अभी तक न तो हाथ से और न ही किसी मशीनरी की मदद से हटाने का प्रयास किया गया है। किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों से राय ली जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार मंदिर के पुजारी की ओर से स्थान परिवर्तन के लिए सहमति दी गई थी और गुरुजी के निर्देशों के आधार पर नए स्थान पर चबूतरा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि, प्रतिमा को अभी तक छुआ नहीं गया है।

तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार

अतिरिक्त नगर निगम आयुक्त संतोष टैगोर के मुताबिक, खड़े हनुमान की प्रतिमा को लेकर तकनीकी पहलुओं का अध्ययन कराया जा रहा है। इसके लिए SGSITS इंदौर और IIT की तकनीकी टीम से विशेषज्ञ राय लेने की तैयारी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी स्थिति पूरी तरह समझने और विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक प्रतिमा को लेकर आगे कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। नई जगह तय होने और चबूतरे की तैयारी के बावजूद अंतिम निर्णय तकनीकी आकलन के बाद ही लिया जाएगा।

विकास बनाम विरासत का सवाल

खड़े हनुमान मंदिर का मामला अब महज सड़क चौड़ीकरण तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर सिंहस्थ 2028 से पहले शहर के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की योजना है, तो दूसरी ओर मंदिर की धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व का सवाल सामने है।

उमा भारती के पत्र के बाद इस मामले में राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। अब देखना यह होगा कि तकनीकी विशेषज्ञों की राय और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन सड़क चौड़ीकरण की मौजूदा योजना में बदलाव करता है या मंदिर के लिए प्रस्तावित वैकल्पिक व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाता है।