उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन में श्री खड़े हनुमान मंदिर को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मंदिर के बाहरी हिस्से को हटाने और भगवान श्री खड़े हनुमान की प्रतिमा को विस्थापित करने के प्रयासों के विरोध में हिंदू संगठनों और संत समाज ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महामंडलेश्वर अतुलेशानंद सरस्वती (आचार्य शेखर) ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिंदू समाज अब इस मामले में पीछे हटने वाला नहीं है।
महामंडलेश्वर ने कहा कि श्री खड़े हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है और इसका धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है। उन्होंने मंदिर से जुड़ी मान्यताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां धागा बांधने से असाध्य रोगों से पीड़ित लोगों के स्वस्थ होने की आस्था लोगों में है।
उन्होंने नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों पर मंदिर के धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व को नहीं समझने का आरोप लगाया। आचार्य शेखर ने कहा कि भगवान हनुमान से बड़ा कोई पुरातत्वविद नहीं हो सकता।
‘मशीनों से हटाने की कोशिश हुई, प्रतिमा नहीं हिली’
महामंडलेश्वर अतुलेशानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि मंदिर के बाहरी हिस्से को हटाने के लिए पोकलेन, जेसीबी और क्रेन जैसी मशीनों का इस्तेमाल किया गया। उनके मुताबिक भगवान खड़े हनुमान की प्रतिमा को भी हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली।
उन्होंने कहा कि शहर के विकास और प्रशासनिक योजनाओं में हिंदू समाज ने पहले भी सहयोग किया है। उनके मुताबिक अब तक 40 से अधिक मंदिरों के विस्थापन को समाज ने स्वीकार किया है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन मंदिर के लिए मौजूद करीब 4 बाय 4 फीट के स्थान को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।
आचार्य शेखर ने कार्रवाई में शामिल लोगों को लेकर भी गंभीर दावे किए। उन्होंने कहा कि मंदिर का शिखर तोड़ने या हथौड़े चलाने वाले कुछ लोग कथित तौर पर बीमार हैं और बिस्तर से उठ नहीं पा रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
‘स्क्रीनिंग हो या कोई और कार्रवाई, यहीं डटे रहेंगे’
महामंडलेश्वर ने प्रशासन के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का ऐलान करते हुए कहा कि संत समाज और हिंदू संगठन मौके पर डटे रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन चाहे स्क्रीनिंग करे या कोई अन्य कदम उठाए, धार्मिक संगठन पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने कहा कि संत समाज और श्रद्धालु इसी स्थान पर धुनी रमाएंगे और भंडारा भी चलाया जाएगा। साथ ही उन्होंने आगामी सिंहस्थ महाकुंभ की शुरुआत इसी पवित्र स्थल से करने की बात कही।
‘मंदिर हटाना सनातन आस्था पर आघात’
आचार्य शेखर ने उज्जैन की धार्मिक और पौराणिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह तीर्थ नगरी और देवभूमि है, जहां बाबा महाकाल विराजमान हैं। उन्होंने सात सागर और 84 महादेव की धार्मिक मान्यताओं का जिक्र करते हुए कहा कि उज्जैन की पहचान सदियों पुरानी सनातन परंपराओं से जुड़ी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि भगवान राम और श्रीकृष्ण की भूमि तथा बाबा महाकाल की नगरी में यदि शांतिपूर्वक पूजा-पाठ करने वाले मंदिरों को इस तरह हटाने की कोशिश की जाएगी, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
फिलहाल श्री खड़े हनुमान मंदिर को लेकर संत समाज और हिंदू संगठनों के विरोध के बीच प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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