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दतिया उपचुनाव की हार पर सख्त एक्शन: जिला भाजपा की पूरी टीम भंग!

भोपाल/दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस से मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए दतिया जिला भाजपा की पूरी कार्यकारिणी तथा सभी मोर्चों और प्रकोष्ठों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। इस कार्रवाई को उपचुनाव के दौरान कथित गुटबाजी और भीतरघात के आरोपों पर पार्टी की सख्त प्रतिक्रिया माना जा रहा है।

भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की मौजूदगी में हुई समीक्षा बैठक में उपचुनाव परिणामों पर करीब दो घंटे तक मंथन हुआ। बैठक में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी, कोर कमेटी के सदस्य और वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे। हार के कारणों पर चर्चा के दौरान आशुतोष तिवारी ने कुछ स्थानीय नेताओं पर निष्क्रिय रहने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए।

व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्डिंग भी सौंपी

सूत्रों के अनुसार, आशुतोष तिवारी ने अपने आरोपों के समर्थन में व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेज प्रदेश नेतृत्व को सौंपे। इन दस्तावेजों के आधार पर संगठन में अनुशासनहीनता और भीतरघात के आरोपों की जांच शुरू कर दी गई है।

इन इकाइयों को किया गया भंग

समीक्षा बैठक के कुछ घंटों बाद जारी आदेश में दतिया जिला भाजपा कार्यकारिणी के साथ-साथ भारतीय जनता युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा, पिछड़ा वर्ग मोर्चा, अल्पसंख्यक मोर्चा और सभी प्रकोष्ठों को भंग कर दिया गया।

नरोत्तम मिश्रा समर्थकों पर असर

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भंग की गई कार्यकारिणी में अधिकांश पदाधिकारी पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के करीबी माने जाते थे। टिकट वितरण, चुनाव प्रचार और बूथ प्रबंधन को लेकर पहले से सवाल उठ रहे थे। इस कार्रवाई के बाद दतिया भाजपा की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

6,016 वोटों से मिली थी हार

दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से हराया था। लगातार दूसरी बार इस सीट पर भाजपा की हार ने संगठन को आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया।

नई टीम जल्द बनेगी

प्रदेश नेतृत्व जल्द ही दतिया के लिए नए पर्यवेक्षक नियुक्त करेगा। नई कार्यकारिणी में युवाओं, अनुभवी नेताओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है। पार्टी इसे 2028 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मान रही है।