उज्जैन। शहर के प्रख्यात व्यंग्यकार एवं सिने समीक्षक शशांक दुबे को उनकी चर्चित आत्मकथा ‘संतरे की गोलियों सा रसीला बचपन’ के लिए प्रतिष्ठित वल्लभराम शर्मा आत्मकथा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राजस्थान के डीग में हिंदी पुस्तकालय समिति द्वारा आयोजित शताब्दी समारोह के अवसर पर प्रदान किया गया।
हिंदी पुस्तकालय समिति के 100वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी की सचिव डॉ. लता श्रीमाली, डीग के पुलिस अधीक्षक जीएस कांबले तथा सिद्धपीठ के पीठाधीश्वर डॉ. कौशल किशोर ने शशांक दुबे को सम्मानित किया।
पुरस्कार के तहत उन्हें 10 हजार रुपये की नकद राशि, शॉल, श्रीफल, स्मृति चिह्न तथा स्मारिका भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस उपलब्धि पर साहित्य एवं पत्रकारिता जगत में खुशी की लहर है। वरिष्ठ व्यंग्यकार शांतिलाल जैन, रमेशचंद्र शर्मा, मुकेश जोशी, डॉ. हरीश कुमार सिंह, अशोक भाटी, दिनेश दिग्गज, सुरेंद्र सर्किट, सुगनचंद जैन और दिनेश विजयवर्गीय सहित अनेक साहित्यकारों ने शशांक दुबे को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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