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सावन के प्रथम सोमवार पर शिवमय हुआ मध्यप्रदेश, बाबा महाकाल की भव्य सवारी में उमड़ा आस्था का सैलाब!

उज्जैन। सावन के प्रथम सोमवार पर मध्यप्रदेश पूरी तरह शिवभक्ति में सराबोर नजर आया। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के सुबह से ही लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान महाकाल के दर्शन के लिए देश-विदेश से आए भक्तों ने लंबी कतारों में खड़े होकर पूजा-अर्चना की। दोपहर 1:30 बजे तक 3,05,797 श्रद्धालु ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन कर चुके थे। नंदी हॉल और कार्तिक मंडपम तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।

दोपहर बाद भगवान श्री महाकाल की पारंपरिक शाही सवारी पूरे धार्मिक वैभव और उत्साह के साथ निकाली गई। इस अवसर पर भगवान महाकाल ‘चंद्रमौलेश्वर’ स्वरूप में रजत (चांदी) की भव्य पालकी में विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। श्रद्धालुओं ने मार्गभर पुष्पवर्षा कर अपने आराध्य का स्वागत किया। पालकी के पीछे सुसज्जित हाथी पर भगवान मनमहेश की प्रतिमा विराजित रही, जिसने सवारी की भव्यता को और बढ़ा दिया।

सवारी मार्ग पर चारों ओर “हर-हर महादेव”, “जय श्री महाकाल” और “बोल बम” के गगनभेदी जयघोष सुनाई दिए। श्रद्धालु भक्ति गीतों और ढोल-नगाड़ों की धुन पर झूमते नजर आए। प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के व्यापक प्रबंध किए गए थे।

इससे पहले सोमवार तड़के रात 2:30 बजे मंदिर के पट भस्म आरती के लिए खोले गए। प्रातःकालीन पूजा में भगवान महाकाल का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन किया गया। दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक के बाद भगवान का भांग, चंदन, सुगंधित पुष्प, ड्राय फ्रूट, रत्नजड़ित आभूषण और दिव्य वस्त्रों से राजाधिराज स्वरूप में मनोहारी श्रृंगार किया गया।

सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन में उमड़ी यह आस्था एक बार फिर भगवान महाकाल के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और सनातन परंपरा की जीवंत झलक बनकर सामने आई।