इंदौर। इंदौर क्राइम ब्रांच के तत्कालीन टीआई सुजीत श्रीवास्तव समेत चार लोगों के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। लोकायुक्त की जांच में शिकायत प्रथमदृष्टया सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम की धारा 7 और बीएनएस की धारा 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
लोकायुक्त संभाग इंदौर के पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के मुताबिक तुलसी नगर निवासी प्रीति हजारी ने 2 अप्रैल 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनके बेटे प्रांजल हजारी को एक शिकायत के संबंध में क्राइम ब्रांच कार्यालय बुलाया गया था। आरोप है कि मामले में कार्रवाई नहीं करने और प्रांजल को छोड़ने के बदले तत्कालीन टीआई सुजीत श्रीवास्तव समेत अन्य पुलिसकर्मियों ने 1.20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी।
शिकायत के अनुसार, रिश्वत की रकम में से 50 हजार 800 रुपये 20 मार्च को यूपीआई के माध्यम से दीपक पटेल के बैंक खाते में ट्रांसफर कराए गए। वहीं, बाकी 70 हजार रुपये नकद लिए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने लेन-देन से जुड़े तकनीकी साक्ष्य भी लोकायुक्त के समक्ष प्रस्तुत किए थे।
तकनीकी साक्ष्यों की भी हुई जांच
शिकायत मिलने के बाद एसपी राजेश सहाय के निर्देश पर लोकायुक्त टीम ने मामले का भौतिक और तकनीकी सत्यापन कराया। इस दौरान यूपीआई लेन-देन समेत शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए अन्य साक्ष्यों और संबंधित तथ्यों की बारीकी से जांच की गई। सत्यापन में शिकायत प्रथमदृष्टया सही पाए जाने के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
वर्तमान में सुजीत श्रीवास्तव डीआरपी लाइन में पदस्थ हैं, जबकि मामले में शामिल एक अन्य आरक्षक अभी क्राइम ब्रांच में ही सेवाएं दे रहा है। लोकायुक्त पुलिस अब प्रकरण से जुड़े अन्य तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच कर रही है।

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