उज्जैन। श्रावण माह के चतुर्थ और अंतिम सोमवार को उज्जैन पूरी तरह शिवभक्ति में डूबी नजर आई। राजाधिराज भगवान श्री महाकालेश्वर अपनी प्रजा का हाल जानने भव्य सवारी के रूप में नगर भ्रमण पर निकले। बाबा महाकाल के दर्शन और सवारी में शामिल होने के लिए देशभर से करीब 7.50 लाख श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। पूरे मार्ग पर हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष गूंजते रहे।
चार स्वरूपों में दिए दर्शन
बाबा महाकाल की सवारी में भगवान चार दिव्य स्वरूपों में विराजमान रहे। पालकी में श्री चंद्रमौलेश्वर, गजराज पर श्री मनमहेश, बैलगाड़ी में गरुड़ पर श्री शिवतांडव और बैलगाड़ी में नंदी पर श्री उमा-महेश के स्वरूप में भगवान ने नगर भ्रमण किया। सवारी के मंदिर से बाहर निकलने पर मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों और महाकाल मंदिर बैंड ने भगवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
उपमुख्यमंत्री ने किया पूजन
सवारी शुरू होने से पहले मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर का विधिवत पूजन मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने किया। इस दौरान संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा और मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक सहित प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
रामघाट पर हुआ पूजन-अभिषेक
महाकाल मंदिर से शुरू हुई सवारी गुदरी चौराहा होते हुए क्षिप्रा नदी के तट स्थित रामघाट पहुंची। यहां मां क्षिप्रा के पवित्र जल से भगवान महाकाल का पूजन और अभिषेक किया गया। इसके बाद सवारी कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, ढाबा रोड और छत्री चौक होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची। यहां सिंधिया ट्रस्ट की ओर से भगवान महाकाल का स्वागत और पूजन किया गया।
झांकी के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप इस बार सवारी में पर्यावरण संरक्षण को प्रमुखता दी गई। मंदिर समिति की ओर से विशेष संदेश रथ और झांकी शामिल की गई, जिसके माध्यम से श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक पौधे लगाने, स्वच्छता बनाए रखने और मां क्षिप्रा को निर्मल रखने का संदेश दिया गया।
31 अगस्त को भाद्रपद की पहली सवारी
श्रावण माह की चार सवारियों के बाद बाबा महाकाल की अगली यानी भाद्रपद माह की पहली सवारी 31 अगस्त 2026 को निकलेगी। इस सवारी में भगवान महाकाल पांच स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देंगे, जिसमें होल्कर स्टेट के मुखारविंद भी शामिल होंगे।

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