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एक सप्ताह में भाजपा के तीन नेताओं का निधन, मध्य प्रदेश की राजनीति में शोक की लहर!

मध्य प्रदेश में पिछले एक सप्ताह के भीतर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीन युवा नेताओं के असामयिक निधन ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों को स्तब्ध कर दिया है। तीनों नेताओं की मौत कथित तौर पर हृदयाघात (हार्ट अटैक) से हुई, जिसके बाद प्रदेशभर में शोक का माहौल है।

छिंदवाड़ा में लोकेश डेहरिया का निधन

सबसे पहले छिंदवाड़ा से दुखद खबर सामने आई, जहां भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के नवनियुक्त जिला अध्यक्ष एवं वार्ड क्रमांक-47 के पार्षद लोकेश डेहरिया का अचानक निधन हो गया। जानकारी के अनुसार, वे पैदल भ्रमण के दौरान मोबाइल फोन पर बात कर रहे थे, तभी अचानक गिर पड़े। उन्हें तत्काल एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई।

अगले दिन ब्यावरा में मनोज राजपूत ने तोड़ा दम

लोकेश डेहरिया के निधन के अगले ही दिन राजगढ़ जिले के ब्यावरा से भाजपा नेता एवं पूर्व पार्षद मनोज राजपूत के निधन की खबर आई। बताया गया कि वे रोजाना की तरह सुबह की सैर पर निकले थे। अंजनीलाल मंदिर क्षेत्र के पास अचानक सीने में तेज दर्द होने के बाद वे सड़क पर गिर पड़े। अस्पताल ले जाने से पहले ही उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक तौर पर इसे भी हृदयाघात का मामला बताया गया।

आज प्रदेश उपाध्यक्ष संजय सिंह यादव का निधन

इसी क्रम में भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष संजय सिंह यादव का भी हृदयाघात से निधन हो गया। उन्हें कुछ महीने पहले ही पार्टी ने यह जिम्मेदारी सौंपी थी। संजय सिंह यादव वरिष्ठ भाजपा नेत्री रजनी यादव के अनुज तथा भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष विवेक यादव के बड़े भाई थे।

उनके निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित पार्टी के अनेक नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

एक सप्ताह में तीन असामयिक मौतों से बढ़ी चिंता

एक सप्ताह के भीतर भाजपा के तीन नेताओं के निधन और तीनों मामलों में प्रारंभिक तौर पर हृदयाघात की बात सामने आने से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, प्रत्येक मामले के कारणों का अंतिम निष्कर्ष संबंधित चिकित्सकीय जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल इन असामयिक निधनों ने पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रदेश की राजनीति को गहरे शोक में डाल दिया है।