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जनसुनवाई में गरमाया माहौल: कलेक्टर और बिजली अधिकारियों के बीच हुई तीखी बहस!

दमोह। दमोह कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक बिजली उपभोक्ता की शिकायत पर कलेक्टर और बिजली विभाग के अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मामला इतना बढ़ गया कि कुछ समय के लिए जनसुनवाई का माहौल गरमा गया।

बिजली काटने की शिकायत लेकर पहुंचा उपभोक्ता

तेंदूखेड़ा विकासखंड के मोहरा गांव निवासी आनंद सिंह लोधी जनसुनवाई में अपनी शिकायत लेकर पहुंचे थे। उन्होंने कलेक्टर प्रताप नारायण यादव को बताया कि उनकी राइस मिल का बिजली बिल विवादित है, लेकिन इसके बावजूद बिजली कंपनी ने उनके घर का घरेलू बिजली कनेक्शन काट दिया है। उन्होंने मांग की कि उनके घर की बिजली तत्काल बहाल की जाए।

कलेक्टर ने दिए बिजली जोड़ने के निर्देश

शिकायत सुनने के बाद कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बिजली विभाग के अधिकारियों को उपभोक्ता के घर की बिजली तुरंत चालू करने के निर्देश दिए। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए ऐसा करने से असमर्थता जताई।

अधिकारियों का कहना था कि बकाया बिजली बिल जमा हुए बिना कनेक्शन बहाल नहीं किया जा सकता और विभाग निर्धारित नियमों के तहत ही कार्रवाई कर सकता है।

विभाग ने बताया कार्रवाई का आधार

बिजली कंपनी के अधिकारियों ने जनसुनवाई में बताया कि आनंद सिंह लोधी की पत्नी लक्ष्मीबाई के नाम पर राइस मिल का बिजली कनेक्शन है, जबकि घरेलू कनेक्शन आनंद सिंह के नाम से दर्ज है। राइस मिल का बिजली बिल बकाया होने के कारण नियमानुसार घरेलू कनेक्शन पर भी कार्रवाई की गई।

बिल विवाद को लेकर उपभोक्ता ने रखी अपनी बात

आनंद सिंह लोधी ने दावा किया कि उनकी राइस मिल का एक माह का बिजली बिल 1.69 लाख रुपये आया था, जिसे उन्होंने चुनौती देते हुए उपभोक्ता फोरम में मामला दर्ज कराया। उनके अनुसार सुनवाई के दौरान फोरम ने 58 हजार रुपये जमा करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बावजूद करीब तीन माह पहले उनके घर की बिजली काट दी गई।

ईई ने लगाए गंभीर आरोप

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब बिजली विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) एम.एल. साहू ने उपभोक्ता पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कलेक्टर के समक्ष कहा कि संबंधित व्यक्ति ने बिजली ट्रांसफार्मर पर कब्जा कर रखा है, जिससे विभागीय कर्मचारियों को कार्य करने में परेशानी होती है।

ईई साहू ने यह भी आरोप लगाया कि मीटर रीडिंग लेने जाने वाले कर्मचारियों को बाधाओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में ट्रांसफार्मर की जांच के दौरान विभागीय अधिकारियों को गोली मारने की धमकी तक दी गई थी, जिसकी शिकायत पुलिस को भी दी जा चुकी है।

जांच और कार्रवाई पर टिकी नजरें

जनसुनवाई में सामने आए आरोप-प्रत्यारोप के बाद अब पूरे मामले पर प्रशासन और बिजली विभाग की कार्रवाई पर नजरें टिकी हुई हैं। एक ओर उपभोक्ता बिजली बहाली की मांग कर रहा है, वहीं विभाग बकाया बिल और सुरक्षा संबंधी मुद्दों का हवाला दे रहा है। ऐसे में मामले का अंतिम समाधान जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही तय होगा।