डॉ. मोहन यादव का जमीनी अंदाज एक बार फिर चर्चा में है। गुरुवार को उन्होंने मध्य प्रदेश के शाजापुर और खरगोन जिलों में उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण कर न केवल व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि सीधे किसानों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं भी सुनीं।
शाजापुर जिले के मकोड़ी स्थित श्यामा वेयर हाउस में मुख्यमंत्री ट्रॉली पर चढ़कर किसानों से बातचीत करते नजर आए। इस दौरान उन्होंने खुद गेहूं की तौल प्रक्रिया को देखा और व्यवस्थाओं की हकीकत जानी। उनका यह अनोखा अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इससे पहले वे सुबह खरगोन जिले के कतरगांव उपार्जन केंद्र पहुंचे, जहां उन्होंने उपार्जन प्रक्रिया का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पष्ट कहा कि हर अन्नदाता को सम्मान और सुविधा के साथ उसकी उपज का उचित मूल्य दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि उपार्जन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की समस्या का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि उपार्जन केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में बारदाने, तौल कांटे, सिलाई मशीन, स्लॉट बुकिंग के लिए कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन और कंप्यूटर ऑपरेटर हमेशा उपलब्ध रहें। साथ ही केंद्रों पर लगाए गए सभी 6 तौल कांटों पर लगातार तुलाई कार्य चलता रहे, ताकि किसानों को इंतजार न करना पड़े।
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने पेयजल, टेंट, बैठने की व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी निरीक्षण किया और जरूरत के अनुसार इन्हें और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
राज्य सरकार द्वारा पहले ही उपार्जन केंद्रों पर छाया, बैठक और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। साथ ही किसानों को अब किसी भी उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज बेचने की सुविधा दी गई है। तौल में देरी न हो, इसके लिए तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी गई है और आवश्यकता अनुसार इसे और बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को मजबूत करने और किसानों को बेहतर सुविधा देने की दिशा में एक गंभीर पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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