बाबा महाकाल के दरबार में होली पर्व के अवसर पर मंदिर की परंपराओं के सुचारु निर्वहन हेतु मंदिर प्रशासन ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गर्भगृह, नंदी मंडपम्, गणेश मंडपम्, कार्तिकेय मंडपम् सहित संपूर्ण मंदिर परिसर और महाकाल लोक क्षेत्र में किसी भी प्रकार का रंग-गुलाल ले जाना, उड़ाना या आपस में लगाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
मंदिर परिसर एवं महाकाल लोक में कार्यरत पुजारी, पुरोहित, प्रतिनिधि, अधिकारी, पुलिसकर्मी, सुरक्षाकर्मी, सफाई कर्मचारी, सेवक तथा अन्य आउटसोर्स कर्मचारी भी रंग-गुलाल लेकर प्रवेश नहीं करेंगे और आपस में रंग नहीं लगाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए भी रंग-गुलाल लाना और लगाना पूर्णतः वर्जित रहेगा। सभी प्रवेश द्वारों पर जांच के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा।
निरीक्षक एवं सुरक्षाकर्मी श्रद्धालुओं के साथ विनम्र व्यवहार रखते हुए सघन जांच सुनिश्चित करेंगे, ताकि कोई भी व्यक्ति रंग-गुलाल या विशेष उपकरण लेकर परिसर में प्रवेश न कर सके। मंदिर कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से संपूर्ण परिसर की निगरानी की जाएगी।
भगवान श्री महाकालेश्वर की त्रिकाल आरतियों के दौरान प्रत्येक आरती में 1-1 किलोग्राम हर्बल गुलाल प्रतीकात्मक रूप से अर्पित किया जाएगा। यह हर्बल गुलाल मंदिर की कोठार शाखा द्वारा संबंधित पुजारियों को उपलब्ध कराया जाएगा।
मंदिर प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि होलिका पर्व मंदिर की गरिमा के अनुरूप हर्षोल्लास एवं सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में मनाया जाए। आदेशों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पिछले साल के जख्म ने बदला नियम
याद दिला दें कि 25 मार्च 2024 को भस्मारती के बाद गर्भगृह में गुलाल उड़ाने से अचानक आग भड़क गई थी। उस आग ने पुजारी, पुरोहित और कई सेवकों को झुलसा दिया था। हादसे में घायल हुए एक सेवक की तो इलाज के दौरान मुंबई में मौत भी हो गई थी। प्रशासन नहीं चाहता कि वैसी लापरवाही दोबारा हो और किसी की जान जोखिम में पड़े।

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