छतरपुर जिले में रहने वाले 80 साल के एक बुजुर्ग रावण के भक्त हैं। वह रोज रावण की पूजा करते हैं। इसके लिए उन्होंने अपने घर में एक मंदिर बनवाया है, जिसमें रावण की एक बड़ी और सुंदर सी प्रतिमा लगा रखी है। रावण की यह प्रतिमा मुस्कुराते हुए आशीर्वाद देने वाली मुद्रा में है, जिसमें 10 सर और हाथ में धनुष बाण के अलावा अन्य अस्त्र-शस्त्र भी हैं।
छतरपुर जिले से लगभग 100 किलोमीटर दूर एक गांव पहरा में रहने वाले रामप्रसाद अहिरवार रावण के भक्त हैं। पिछले 3 सालों से घर में रावण का मंदिर बनाकर पूजा कर रहे हैं। रामप्रसाद एक रिटायर्ड शिक्षक हैं। वह रावण की सुबह शाम पूजा कर उन्हे अगरबत्ती दिखाते हैं। बुजुर्ग का कहना है कि उन्हे रावण पसंद है। उन्होंने अभी तक जितना भी रावण के बारे में पढ़ा या समझा रावण बुरा नही था। इसी वजह से वह रावण से इतने प्रभावित हुए। उन्होंने अपने घर में रावण का मंदिर बनाने और उसकी पूजा करने का निर्णय लिया। मंदिर में रावण की प्रतिमा के अलावा रामप्रसाद ने अपनी स्वर्गीय पत्नी, भगवान बुद्ध की भी प्रतिमाएं स्थापित की है। रामप्रसाद प्रतिदिन सुबह-शाम रावण की पूजा कर उसे अगरबत्ती भी दिखाते हैं।
घर में ही बनाया है रावण का मंदिर
बता दें कि रामप्रसाद पेशे से एक सरकारी शिक्षक थे। पिछले दो सालों में रावण के प्रति उनकी आस्था बढ़ी और उन्होंने रावण की प्रतिमा को अपने मंदिर में स्थापित करा दिया। रावण की पूजा करने को लेकर उनका तर्क है की वह एक शांति प्रिय राजा था और शुरुआती दिनों में उसे हिंसा पसंद नही थी।

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