उज्जैन। दीपावली के पावन पर्व पर बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में भक्ति, परंपरा और सुरक्षा का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। श्री महाकालेश्वर मंदिर में दीपोत्सव की शुरुआत पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के साथ हो गई है। मंदिर की संध्या आरती में भगवान महाकाल के समक्ष परंपरानुसार एक फुलझड़ी जलाकर दीपोत्सव का शुभारंभ किया गया। वहीं, मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर और महाकाल लोक में आतिशबाजी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है।
चारों आरतियों में जलेगी एक-एक फुलझड़ी
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, 8 नवंबर को दीपावली के अवसर पर भगवान महाकाल की चार प्रमुख आरतियां विशेष परंपरा के साथ संपन्न होंगी। प्रातः भस्म आरती, अभ्यंग स्नान के बाद होने वाली आरती, संध्या आरती और शयन आरती में परंपरानुसार केवल एक-एक फुलझड़ी जलाई जाएगी। यह परंपरा मंदिर की प्राचीन धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा है।
महाकाल मंदिर और महालोक में आतिशबाजी प्रतिबंधित
दीपावली पर मंदिर परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। गर्भगृह, कोटितीर्थ कुंड, मंदिर परिसर और श्री महाकाल महालोक क्षेत्र में पटाखे फोड़ने, अनार, फुलझड़ी या अन्य आतिशबाजी सामग्री लाने और इस्तेमाल करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से पर्व मनाएं। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
भस्म आरती में भांग से सजा बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप
दीपोत्सव की तैयारियों के बीच शुक्रवार तड़के 4 बजे संपन्न हुई भस्म आरती में भगवान महाकाल का अलौकिक शृंगार किया गया। कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वादशी-त्रयोदशी तिथि पर मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया।
प्रथम घंटाल बजने के साथ हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी का मुकुट और मुंड माला धारण कराई गई। इस दिन के शृंगार की विशेष बात भगवान का भांग से किया गया दिव्य शृंगार रहा। इसके बाद बाबा को पवित्र भस्म अर्पित की गई।
जय श्री महाकाल के उद्घोष से गूंजा मंदिर परिसर
भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर भक्त भावविभोर हो उठे और पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
दीपावली के अवसर पर महाकाल मंदिर की यह परंपरा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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