उज्जैन। अधिकमास के अंतिम दिन सोमवार को सोमवती अमावस्या का दुर्लभ महासंयोग बनने से धर्मनगरी उज्जैन में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। तड़के से ही शिप्रा नदी के रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट और सोमकुंड पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हजारों भक्तों ने पवित्र स्नान कर पूजा-अर्चना, तर्पण और दान-पुण्य के माध्यम से पुण्य लाभ अर्जित किया।
धर्माचार्यों के अनुसार इस बार सोमवती अमावस्या का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि यह अधिकमास के समापन दिवस पर पड़ रही है। सोमवार, अमावस्या तिथि, मृगशिरा नक्षत्र और पुरुषोत्तम मास के अंतिम दिन का संयोग इसे अत्यंत शुभ और फलदायी बना रहा है।
अमृत सिद्धि योग में किए गए धार्मिक अनुष्ठान
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक सोमवती अमावस्या पर अमृत सिद्धि योग का विशेष प्रभाव रहा। मान्यता है कि इस शुभ योग में किए गए स्नान, जप, तप, दान और पूजन का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसी कारण सुबह से ही श्रद्धालु शिप्रा तट पर धार्मिक अनुष्ठानों में जुटे रहे।
पितरों की शांति के लिए किया तर्पण
अमावस्या तिथि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म किए। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा कर पितरों का स्मरण किया और उनके निमित्त दान-पुण्य किया। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए तर्पण और दान से पितृ दोषों का निवारण होता है तथा पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
महाकाल मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों में उमड़ी भीड़
अधिकमास के अंतिम दिन महाकाल मंदिर समेत उज्जैन के विभिन्न मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगल की कामना की। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही बनी रही।
सूर्य का मिथुन राशि में होगा प्रवेश
ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन विशेष माना जा रहा है। सोमवार दोपहर 12:32 बजे सूर्य वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसका प्रभाव आगामी एक माह तक देखने को मिलेगा।
दान-पुण्य का विशेष अवसर
धर्माचार्यों का कहना है कि जो श्रद्धालु अधिकमास के दौरान दान-पुण्य या धार्मिक अनुष्ठान नहीं कर सके, उनके लिए सोमवती अमावस्या अंतिम और विशेष अवसर है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए दान, पूजा और सेवा कार्यों से भगवान और पितरों की कृपा प्राप्त होती है।

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