मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। राजधानी भोपाल में शनिवार को प्रदेशभर से आए शिक्षकों ने बड़ा प्रदर्शन किया। भेल स्थित दशहरा मैदान में जुटे हजारों शिक्षक ‘मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा’ के तहत अपनी मांगों को लेकर एकजुट नजर आए। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में आयोजकों के मुताबिक 50 हजार से अधिक शिक्षक शामिल हुए। इससे पहले भी जिला और ब्लॉक स्तर पर आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन अब मामला राज्य स्तर पर पहुंच गया है।
शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति के समय उन्होंने सभी जरूरी योग्यता पूरी की थी, ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद TET जैसी परीक्षा को अनिवार्य करना अनुचित है। 20-25 साल से पढ़ा रहे शिक्षकों पर नई शर्त थोपना उनके अनुसार न्याय के खिलाफ है।
शिक्षकों ने आरोप लगाया कि पहले से ही सेवा अवधि की गणना सही तरीके से नहीं हो रही, जिससे वेतन, पेंशन और ग्रेच्युटी पर असर पड़ रहा है। अब TET की अनिवार्यता ने उनकी नौकरी और भविष्य को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
सरकार का कानूनी दांव
इधर, मध्य प्रदेश सरकार ने मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल कर दी है। 17 अप्रैल को शाम 4 बजे ई-फाइलिंग के जरिए यह याचिका प्रस्तुत की गई। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार इस मुद्दे को कानूनी स्तर पर सुलझाने की कोशिश में है।
आंदोलन और कानूनी लड़ाई साथ-साथ
एक तरफ शिक्षक सड़कों पर उतरकर दबाव बना रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार अदालत के जरिए समाधान तलाश रही है। हालांकि, शिक्षक संगठनों का कहना है कि रिव्यू पिटीशन अपनी जगह है, लेकिन जब तक TET का दबाव खत्म नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

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