मध्यप्रदेश में ठंड ने एक बार फिर तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। कश्मीर के गुलमर्ग और सोनमर्ग में लगातार हो रही बर्फबारी का सीधा असर प्रदेश के मौसम पर नजर आ रहा है, जिससे सर्द हवाओं के साथ कोहरे और शीतलहर का प्रकोप बढ़ गया है। प्रदेश के उत्तरी इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। कई जगहों पर विजिबिलिटी घटकर सिर्फ 50 मीटर रह गई, जिससे यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ा। दतिया और रीवा में सड़क के साथ-साथ रेल परिचालन भी प्रभावित हुआ।
22 जिलों में घना कोहरा, शीतलहर ने बढ़ाई मुश्किल
ग्वालियर, चंबल, रीवा, सागर, जबलपुर और शहडोल संभाग के कुल 22 जिलों में घना कोहरा दर्ज किया गया। ग्वालियर, मुरैना, टीकमगढ़, छतरपुर, सतना, रीवा और सीधी में कोहरे के साथ शीतलहर का असर भी बना रहा। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, सीहोर, रायसेन, विदिशा, शाजापुर और आगर-मालवा सहित कई शहरों में मध्यम स्तर का कोहरा देखने को मिला।
अगले दो दिन साफ मौसम, लेकिन बढ़ेगी ठिठुरन
मौसम विभाग के अनुसार 24 और 25 दिसंबर को अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहने की संभावना है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में सुबह के समय हल्का कोहरा बना रह सकता है। साफ आसमान के बावजूद ठंड का असर और तेज होगा, खासकर रात के तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी।
पचमढ़ी सबसे ठंडा, कई शहरों में पारा 6 डिग्री के आसपास
प्रदेश के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई।प्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा, जहां तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। रीवा में 5.6 डिग्री और शहडोल के कल्याणपुर में 5.9 डिग्री दर्ज किया गया।भोपाल और इंदौर में न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री, जबलपुर में 9 डिग्री और ग्वालियर में 11.3 डिग्री रहा। कई अन्य जिलों राजगढ़, खजुराहो, सतना, बैतूल, मंडला, रायसेन और सागर में भी पारा 7 से 9 डिग्री के बीच रहा।
नवंबर–दिसंबर में टूटा ठंड का रिकॉर्ड
इस बार सर्दी ने नवंबर के बाद दिसंबर में भी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भोपाल में नवंबर के दौरान लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे लंबा दौर माना जा रहा है। 17 नवंबर की रात राजधानी में तापमान 5.2 डिग्री तक गिर गया था, जो अब तक का रिकॉर्ड है।इंदौर में भी 25 साल बाद इतनी ठंडी रात दर्ज की गई, जबकि दिसंबर में भोपाल और इंदौर दोनों जगह तापमान 5 डिग्री से नीचे जा चुका है।
दिसंबर,जनवरी क्यों होते हैं सबसे ठंडे?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दिसंबर और जनवरी प्रदेश के सबसे ठंडे महीने होते हैं। इस दौरान उत्तर भारत से आने वाली ठंडी हवाएं और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) तापमान को तेजी से नीचे गिरा देते हैं। कई बार मावठा गिरने से दिन के तापमान में भी ठंडक बढ़ जाती है।

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