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खाद संकट पर कृषि मंत्री कंसाना का बेतुका बयान, बोले प्री-प्लान होता है खाद के लिए हंगामा!

कृषि विभाग की 2 साल की उपलब्धि बताने के दौरान कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना खाद की कमी के सवाल में उलझते हुए दिखाई दिए. उन्होंने खाद को लेकर लगने वाली किसानों की लाइनों को सोची समझी रणनीति का हिस्सा बताया.

मंत्री कंसाना ने कहा कि “खाद में लगने वाली लाइनों के फोटो वीडियो कैसे और कहां से आते हैं, सभी जानते हैं. यह सब प्री प्लान होता है. चार लोगों को भीड़ में घुसाकर वीडियो बनाए जाते हैं और फिर थप्पड़ दिखाए जाते हैं.

जबकि आंकड़ों में देखा जाए पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्यादा खाद मिली है.” उधर कृषि मंत्री ने कहा, “खाद के लिए लाइनें जल्द ही खत्म होने जा रही है. जनवरी 2026 से सरकार ऑनलाइन खाद की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है. रजिस्ट्रेशन कराने के बाद खाद किसानों के घर पहुंचेगी.”

कृषि विभाग की उपलब्धियां और आगामी योजनाओं को लेकर कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना पत्रकारों से रू-ब-रू हुए. हालांकि, जब वे सवालों में उलझे तो कृषि विभाग के आयुक्त निशांत वरवड़े ने मोर्चा संभाला. उन्होंने बताया कि “प्रदेश में खाद वितरण का 70 फीसदी काम एफओआर के माध्यम से हो रहा है. देश में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ही ऐसे 2 राज्य हैं, जहां खाद वितरण की यह व्यवस्था लागू है, जबकि बाकी राज्यों में निजी माध्यम से खाद का वितरण होता है.

हम जो काम कर रहे हैं, उसे और बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं. खाद की होम डिलीवरी करने के लिए सरकार ने ई विकास (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) सिस्टम पर काम शुरू कर दिया है. इस ई-विकास पोर्टल को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विदिशा, शाजापुर, जबलपुर में शुरू किया गया. इसमें 1 लाख 70 हजार किसानों ने इस योजना का लाभ लिया है. जनवरी 2026 से इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा.”

इस तरह होगी खाद की ई डिलेवरी

कृषि विकास विभाग के आयुक्त निशांत वरवड़े ने बताया, “इस पोर्टल पर किसान को अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इसका रजिस्ट्रेशन आधार कार्ड के माध्यम से होगा. आधार कार्ड डालते ही किसान के नाम दर्ज कृषि भूमि की पूरी डिटेल आ जाएगी. इसमें किसान को बताना होगा कि कितने एरिया में कौन सी फसल किसान लगाने जा रहा है. उस फसल के हिसाब से खाद का कोटा तय हो जाएगा. इसके बाद निर्धारित समय में खाद उपलब्ध करा दी जाएगी.”