लैंड पूलिंग योजना की निरस्ती के बाद उज्जैन–इंदौर ग्रीनफील्ड रोड निर्माण को लेकर प्रभावित सात गांवों के किसानों का आक्रोश सामने आया है। बड़ी संख्या में किसान मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे सड़क निर्माण का काम नहीं होने देंगे।
किसानों का कहना है कि ग्रीनफील्ड रोड की ऊंचाई अत्यधिक रखी जा रही है, जिससे आसपास के खेत, रास्ते और व्यापार बुरी तरह प्रभावित होंगे। उनकी प्रमुख मांग है कि सड़क की ऊंचाई ग्राउंड लेवल पर रखी जाए, ताकि जलभराव, आवागमन और कृषि कार्यों में कोई परेशानी न हो। दूसरी अहम मांग यह है कि भूमि अधिग्रहण के बदले दिया जाने वाला मुआवजा वर्तमान दर से दुगना किया जाए, क्योंकि मौजूदा मुआवजा किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि इस रोड से न तो किसानों को और न ही व्यापारियों को कोई वास्तविक लाभ मिलेगा, बल्कि उनकी आजीविका पर संकट आएगा। किसानों ने प्रशासन से मांग की कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और शीघ्र समाधान निकाला जाए।
प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की
इंदौर-उज्जैन के बीच प्रस्तावित ग्रीन फील्ड रोड से प्रभावित उज्जैन जिले के सात गांवों के किसानों ने अपनी मांगों को लेकर बाइक रैली निकाली। किसान काले झंडे बांधकर उज्जैन स्थित एमपीआरडीसी (MPRDC) कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के दौरान किसानों की बाइक पर काले झंडे लगे थे, जिन पर MPRDC GO BACK लिखा हुआ था। एमपीआरडीसी के अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा।
450 बीघा जमीन प्रभावित
उज्जैन-इंदौर के बीच नया ग्रीन फील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे करीब 2000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से सिंहस्थ- 2028 को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। इससे इंदौर से उज्जैन की दूरी और यात्रा 30-45 मिनट कम हो जाएगी। 48 किलोमीटर की यह सड़क पितृ पर्वत इंदौर से शुरू होकर सिंहस्थ बायपास उज्जैन तक बनेगी। किसानों का कहना है कि इस परियोजना से सात गांवों के करीब 280 किसानों की लगभग 450 बीघा जमीन प्रभावित हो रही है।
बाइक रैली निकाली
उज्जैन संघर्ष समिति के राजेश सोलंकी ने बताया कि लिम्बा पिपलिया से बाइक रैली की शुरुआत हुई, जो गोंदिया, हासामपुरा, पालखेड़ी, चांदमुख, दाउदखेड़ी, चिंतामन गणेश, शांति पैलेस चौराहा, कोठी और फ्रीगंज होते हुए एमपीआरडीसी कार्यालय पहुंची। यहां किसानों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगें लिखित रूप में रखीं।

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