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पत्नी की हत्या कर बिस्तर पेटी में जलाया शव, आरोपी पति को उम्रकैद; अदालत ने सुनाया फैसला

उज्जैन। मध्य प्रदेश में पत्नी की नृशंस हत्या कर साक्ष्य मिटाने के इरादे से शव को बिस्तर पेटी में जलाने वाले आरोपी पति को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार बंसल की अदालत ने आरोपी विजय परमार को हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया।

पुलिस के अनुसार, नरवर थाना क्षेत्र के ग्राम पालखंदा में किराना दुकान संचालित करने वाले विजय परमार का अपनी पत्नी दीपाबाई के साथ लंबे समय से विवाद चल रहा था। विवाद इतना बढ़ गया था कि दीपाबाई ने देवास के सिविल लाइन थाने में पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया था। वह करीब आठ साल तक अपने मायके में रही। जुलाई 2021 में समझौते के बाद विजय उसे वापस घर ले आया, लेकिन इसके बावजूद दोनों के बीच विवाद और मारपीट का सिलसिला जारी रहा।

शराब के नशे में की थी पत्नी की हत्या

घटना 10 मई 2023 की रात की है। बताया जाता है कि विजय शराब के नशे में घर पहुंचा और पत्नी दीपाबाई के साथ जमकर मारपीट की। इसके बाद दीपाबाई अचानक लापता हो गई। आरोपी ने परिजनों के सामने भी उसके बारे में कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया।

12 मई की रात विजय की मां सावित्रीबाई ने जब उससे दीपाबाई के बारे में सख्ती से पूछताछ की तो उसने बेफिक्र होकर कह दिया कि वह मर गई है। इस जवाब से परिजनों को संदेह हुआ और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस जांच में सामने आया कि विजय ने पत्नी की हत्या करने के बाद शव को घर में रखी बिस्तर पेटी में डालकर जला दिया था, ताकि अपराध के साक्ष्य मिटाए जा सकें।

पुलिस की प्रभावी पैरवी से आरोपी को उम्रकैद

मामले में नरवर थाना पुलिस ने आरोपी विजय परमार के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने से संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। विवेचना के दौरान निरीक्षक बल्लू सिंह मंडलोई को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया।

न्यायालय में पेश किए गए साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के आधार पर अदालत ने विजय परमार को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले को जघन्य अपराध के मामलों में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।