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उज्जैन में शिप्रा आरती को लेकर विवाद, महाकाल मंदिर समिति और पुरोहित आमने-सामने

उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में श्रावण मास के दौरान रामघाट पर होने वाली मां शिप्रा की दैनिक आरती को लेकर विवाद गहरा गया है। करीब 11 वर्षों से रामघाट पर आरती करा रहे तीर्थ पुरोहितों और श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के बीच आरती स्थल को लेकर टकराव की स्थिति बन गई। विरोध के दौरान पुलिस और कुछ पुरोहितों के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई की स्थिति भी सामने आई।

आरती को भव्य स्वरूप देने की तैयारी

जानकारी के अनुसार, श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने हरिद्वार, अयोध्या और काशी की तर्ज पर मां शिप्रा की आरती को भव्य स्वरूप देने का निर्णय लिया है। प्रशासन के मुताबिक, जिस स्थान पर भगवान महाकाल की पालकी का पूजन होता है, उसी स्थान से मंदिर समिति द्वारा शिप्रा आरती कराने की योजना है।

इसी व्यवस्था के तहत मंदिर समिति के बटुक रामघाट पर आरती की तैयारी के लिए पाट बिछाने पहुंचे। इस पर श्री क्षेत्र पंडा समिति से जुड़े पुरोहितों ने विरोध शुरू कर दिया। मामला बढ़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कुछ पुरोहितों को वहां से हटाया और मंदिर समिति के बटुकों द्वारा आरती संपन्न कराई गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई और स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई।

एसडीएम बोले- किसी को आरती रोकने का अधिकार नहीं

एसडीएम पवन बारिया ने कहा कि रामघाट पर शिप्रा आरती को भव्य और व्यवस्थित स्वरूप देना मंदिर समिति का निर्णय है। उन्होंने कहा कि आरती रोकने का अधिकार किसी को नहीं है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बड़ी एलईडी स्क्रीन सहित श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अन्य व्यवस्थाएं भी विकसित की जाएंगी।

पंडा समिति ने जताया विरोध

श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष पंडित राजेश त्रिवेदी ने प्रशासन के फैसले पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि तीर्थ पुरोहित वर्ष 2015 से रामघाट पर शिप्रा आरती कराते आ रहे हैं और उन्होंने ही इसे भव्य स्वरूप प्रदान किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 11 वर्षों बाद पुरोहितों को इस परंपरा से अलग करने का प्रयास किया जा रहा है। पंडित त्रिवेदी ने कहा कि घाट पर अधिकार को लेकर पुरोहित पक्ष अपने पुश्तैनी रिकॉर्ड प्रशासन के सामने पेश करेगा।

पुरोहितों की दो प्रमुख मांगें

विवाद के बीच पंडा समिति की ओर से दो प्रमुख मांगें रखी गई हैं—

  • रामघाट क्षेत्र में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई जाए।
  • महाकाल मंदिर में पुरोहितों को भी नियमित पूजन की अनुमति दी जाए।

प्रशासन बोला- अन्य घाटों की आरती पर रोक नहीं

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उज्जैन के अन्य घाटों पर होने वाली शिप्रा आरती पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई है। विवाद केवल उस स्थान को लेकर है, जहां भगवान महाकाल की पालकी का पूजन होता है और जहां से मंदिर समिति द्वारा आरती कराने की योजना बनाई गई है।

प्रशासन का कहना है कि उद्देश्य किसी परंपरा को समाप्त करना नहीं, बल्कि मां शिप्रा की आरती को अधिक भव्य, आकर्षक और सुव्यवस्थित बनाना है। विवाद को देखते हुए रामघाट क्षेत्र में पुलिस बल तैनात किया गया है।

जल सत्याग्रह कर जताया विरोध

पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किए जाने के विरोध में पंडा समिति से जुड़े पुजारियों और पुरोहितों ने शनिवार को शिप्रा नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया। इस दौरान उन्होंने महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति और संबंधित अधिकारियों को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की।

श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष पंडित राजेश त्रिवेदी ने कहा कि समिति अब तक शांतिपूर्ण तरीके से नई व्यवस्था का विरोध कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने शिप्रा तट पर आरती कराना बंद नहीं किया, तो समिति के सदस्य अपने परिवारों के साथ सामूहिक प्रदर्शन करेंगे।

फिलहाल रामघाट पर शिप्रा आरती की व्यवस्था को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बना हुआ है। प्रशासन की नई व्यवस्था और पुरोहितों के विरोध के बीच आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।