उज्जैन। श्रावण के पावन माह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का शुक्रवार उज्जैन में धार्मिक आस्था, महिला सशक्तिकरण और न्यायिक अधोसंरचना से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के नाम रहा। मुख्यमंत्री ने श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन-पूजन किए। इसके बाद महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के उद्देश्य से हैंडलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का शुभारंभ किया। वहीं, न्यायिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में आधुनिक न्यायाधीश अतिथि गृह के निर्माण का भूमिपूजन और शिलान्यास भी किया गया।
महाकाल मंदिर में भक्ति भाव में डूबे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान महाकाल और श्री नंदीजी का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। इसके बाद वे शयन आरती में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने भक्ति भाव से झांझ बजाई।
दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं से बातचीत कर व्यवस्थाओं और दर्शन प्रक्रिया की जानकारी ली। मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर रौशन कुमार सिंह तथा प्रशासक प्रथम कौशिक ने मुख्यमंत्री का दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत किया और स्मृति चिन्ह भेंट किया।
महिलाओं को मिलेगा छह माह का नि:शुल्क प्रशिक्षण
राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने इंदौर रोड स्थित बाबा साहब नातू सामुदायिक भवन में हैंडलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का शुभारंभ किया। सेंटर का उद्देश्य महिलाओं को पारंपरिक हाथकरघा कला से जोड़कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
यहां महिलाओं को छह महीने तक नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में बुनाई, लूम संचालन और कपड़ा निर्माण जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। इसके अलावा महिलाओं को घर पर चरखे के माध्यम से काम करने का अवसर भी उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार के अनुसार इस व्यवस्था से महिलाएं घर से काम करते हुए लगभग 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह तक आय अर्जित कर सकेंगी। सेंटर में कॉटन और रेशम उत्पादन पर विशेष फोकस रहेगा।
खुद चरखा चलाकर महिलाओं से किया संवाद
मुख्यमंत्री ने सेंटर में स्वयं चरखा चलाकर महिलाओं से संवाद किया और हाथकरघा से जुड़े कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने प्रथम तल पर प्रशिक्षण केंद्र और भूतल पर शोरूम विकसित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप हाथकरघा को प्रोत्साहन देना, देश की पारंपरिक कला और शिल्प को संरक्षित करना तथा महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
‘मृगनयनी’ से कारीगरों को मिलेगा बड़ा बाजार
कार्यक्रम में बताया गया कि मृगनयनी देश का पहला सरकारी ODOP डिजिटल प्लेटफॉर्म बन चुका है। इसके माध्यम से मध्य प्रदेश के कारीगरों और बुनकरों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। इससे स्थानीय हस्तशिल्प और हाथकरघा उत्पादों को व्यापक बाजार मिलने की उम्मीद है।
18.66 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक न्यायाधीश अतिथि गृह
उज्जैन दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायिक अधोसंरचना से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना का भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया।
करीब 18.66 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक न्यायाधीश अतिथि गृह का निर्माण किया जाएगा। यह भवन 1.947 एकड़ भूमि पर जी+1 संरचना में प्रस्तावित है।
परियोजना के तहत भूतल पर चार वीआईपी और दो सामान्य सुइट बनाए जाएंगे, जबकि प्रथम तल पर एक वीवीआईपी और आठ सुइट प्रस्तावित हैं। आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह भवन न्यायिक अधिकारियों एवं अतिथियों के लिए बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आस्था, रोजगार और विकास—एक ही दिन में तीन अहम पड़ाव
श्रावण माह में मुख्यमंत्री का उज्जैन दौरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ महिला आत्मनिर्भरता और न्यायिक अधोसंरचना के विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा। एक ओर महाकाल की भक्ति में मुख्यमंत्री नजर आए, तो दूसरी ओर हाथकरघा के जरिए महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और न्यायिक सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में योजनाओं की शुरुआत हुई।

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