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मंदसौर में अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश, 6 गिरफ्तार

मंदसौर। मध्यप्रदेश पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मंदसौर में सक्रिय एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना समेत 6 आरोपियों को राजस्थान और बिहार से गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में आरोपियों द्वारा 150 से अधिक साइबर घटनाओं के जरिए 11 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 22 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 30 मोबाइल सिम और 5 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। इसके अलावा अलग-अलग बैंक खातों में जमा 8 लाख रुपये से अधिक की राशि फ्रीज कराई गई है।

मेट्रिमोनियल साइट पर NRI बनकर फंसाते थे

पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य मेट्रिमोनियल वेबसाइट्स पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को निशाना बनाते थे। आरोपी खुद को NRI बताते और शादी का झांसा देकर पीड़ितों से बातचीत शुरू करते थे। फर्जी तस्वीरों और कथित परिजनों के जरिए व्हाट्सऐप पर संपर्क बढ़ाकर भरोसा कायम किया जाता था।

मंदसौर के शामगढ़ की एक महिला भी इसी तरीके से ठगी का शिकार हुई। महिला से संपर्क करने वाले आरोपी ने खुद को NRI बताया और शादी का भरोसा दिलाया। इसके बाद विदेश से गिफ्ट भेजने की बात कही गई। गिफ्ट कस्टम विभाग में फंसने का हवाला देकर कस्टम ड्यूटी और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर महिला से अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई गई।

इस तरह महिला से कुल 7 लाख 50 हजार रुपये की ठगी की गई। शिकायत मिलने के बाद शामगढ़ थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

दो महीने तक तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल

मंदसौर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीना के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने करीब दो महीने तक बैंकिंग ट्रांजैक्शन, मोबाइल नंबर, तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल नेटवर्क का विश्लेषण किया। जांच में आरोपियों की पहचान सामने आने के बाद पुलिस ने राजस्थान के जयपुर में दबिश देकर कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पूछताछ और आगे की विवेचना के आधार पर गिरोह के एक अन्य सदस्य तथा मुख्य सरगना को बिहार के अरवल जिले से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, गिरोह अलग-अलग राज्यों से अपना नेटवर्क संचालित कर रहा था।

150 से ज्यादा म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल

पुलिस जांच में सामने आया कि ठगी की रकम के लेनदेन के लिए 150 से अधिक म्यूल बैंक खातों और मोबाइल सिम का इस्तेमाल किया गया। इनमें कई सिम आगरा, फिरोजाबाद, दिल्ली और बिहार से हासिल की गई थीं, जबकि कुछ सिम और बैंक खाते भोपाल से लिए गए थे।

आरोपी अलग-अलग राज्यों में जाकर ठगी की रकम निकालते थे और कुछ समय बाद अपना ठिकाना बदल लेते थे। बैंक खाते फ्रीज होने पर मोबाइल फोन, सिम, पासबुक और एटीएम कार्ड नष्ट कर दिए जाते थे। इसके बाद नए मोबाइल, सिम और बैंक खातों के जरिए ठगी का नेटवर्क फिर सक्रिय कर दिया जाता था।

पुलिस के मुताबिक, गिरोह का एक मुख्य सदस्य अलग-अलग बैंक खातों में जमा रकम की जानकारी रखता था और अन्य सदस्यों को रकम निकालने तथा निर्धारित खातों में जमा करने के निर्देश देता था।

पुलिस ने साइबर ठगी से बचने की अपील की

पुलिस ने आमजन से साइबर अपराधों को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस के अनुसार, अनजान लोगों द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। मेट्रिमोनियल साइट्स, ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश, विदेशी गिफ्ट या आकर्षक ऑफर के नाम पर होने वाले संपर्कों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।