उज्जैन। बाबा महाकाल के दरबार में वीआईपी और आम श्रद्धालुओं के बीच किए जाने वाले भेदभाव को लेकर सांसद अनिल फिरोजिया ने एक बार फिर अपना विरोध दर्ज कराया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर महाकाल मंदिर पहुंचे सांसद ने वीआईपी प्रवेश का प्रस्ताव ठुकराते हुए आम भक्तों के साथ कतार में लगकर बाबा महाकाल के दर्शन किए।
बुधवार को महाकाल मंदिर में उस समय अलग दृश्य देखने को मिला, जब मंदिर प्रशासन और अधिकारियों द्वारा वीआईपी गेट से प्रवेश कराने के आग्रह के बावजूद सांसद अनिल फिरोजिया ने सामान्य श्रद्धालुओं के लिए निर्धारित मार्ग को चुना। वे आम भक्तों के साथ लाइन में लगे और बैरिकेड्स से ही बाबा महाकाल को नमन किया। मंदिर के नंदी हॉल में उनके स्वागत और दर्शन की व्यवस्था की गई थी, लेकिन उन्होंने वहां जाने के बजाय आम श्रद्धालुओं के साथ रहना उचित समझा।
“भगवान के दरबार में सभी समान”
सांसद अनिल फिरोजिया लंबे समय से महाकाल मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं। उनका कहना है कि भगवान के दरबार में किसी भी व्यक्ति का दर्जा बड़ा या छोटा नहीं होता। चाहे वह जनप्रतिनिधि हो, अधिकारी हो या आम नागरिक, सभी को समान अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कई अवसरों पर यह मुद्दा उठाया है कि जहां वीआईपी श्रेणी के लोगों को सीधे गर्भगृह तक पहुंचने की सुविधा मिल जाती है, वहीं आम श्रद्धालुओं, बुजुर्गों और महिलाओं को घंटों कतार में खड़े रहना पड़ता है।
महाशिवरात्रि पर भी जताई थी आपत्ति
यह पहला अवसर नहीं है जब सांसद ने इस विषय पर विरोध दर्ज कराया हो। इससे पहले महाशिवरात्रि पर्व पर आयोजित तहसील पूजा के दौरान भी उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के गर्भगृह में प्रवेश और आम श्रद्धालुओं को बैरिकेड्स तक सीमित रखने पर नाराजगी व्यक्त की थी। उस समय भी उन्होंने विशेष सुविधा लेने से इनकार कर सामान्य श्रद्धालुओं की तरह ही दर्शन किए थे।
गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं को प्रवेश देने की मांग
जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में भी सांसद ने गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश का मुद्दा उठाया था। उन्होंने प्रशासन से मांग की थी कि प्रतिदिन निर्धारित समय के लिए आम भक्तों को भी गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी जाए।
सांसद ने इस दौरान अपनी 85 वर्षीय माता का उदाहरण देते हुए कहा था कि वे शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद महाकाल दर्शन के लिए आती हैं, लेकिन गर्भगृह में प्रवेश न मिलने से निराश लौटती हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए।
प्रोटोकॉल व्यवस्था पर उठाए सवाल
सांसद ने मंदिर में लागू प्रोटोकॉल व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि विशेष अनुमति और वीआईपी व्यवस्था का उपयोग केवल निर्धारित नियमों के तहत होना चाहिए। किसी व्यक्ति के प्रभाव या पद के आधार पर मिलने वाली सुविधाएं आम श्रद्धालुओं के लिए असुविधा का कारण बनती हैं।
सिंहस्थ-2028 की सुरक्षा को लेकर भी सक्रिय
महाकाल मंदिर और आगामी सिंहस्थ-2028 को लेकर सांसद सुरक्षा व्यवस्था को भी महत्वपूर्ण मानते हैं। वे केंद्र सरकार को पत्र लिखकर मंदिर परिसर में CISF या CRPF की स्थायी तैनाती की मांग कर चुके हैं। उनका मानना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती आवश्यक है।
श्रद्धालु सुविधाओं का कलेक्टर ने किया निरीक्षण
इधर, आगामी श्रावण मास और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने महाकाल मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने सामान्य दर्शन मार्ग और विशेष दर्शन टिकट से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रावण मास शुरू होने से पहले दर्शन व्यवस्था को अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए भीड़ प्रबंधन, कतार व्यवस्था, पेयजल, छाया और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को अभी से मजबूत करना आवश्यक है।

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