उज्जैन: अंबोदिया स्थित सेवाधाम आश्रम में बीते एक वर्ष के दौरान हुई 17 संदिग्ध मौतों के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और आश्रम संचालन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार मृतकों में 11 बच्चे और 6 वयस्क शामिल बताए जा रहे हैं। इन मौतों के पीछे बीमारी, लापरवाही या अन्य कारणों की आशंका जताई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, सामाजिक न्याय विभाग और जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
न्यायालय ने एक विशेष जांच समिति गठित करने के निर्देश भी दिए हैं, जो आश्रम की व्यवस्थाओं, चिकित्सा सुविधाओं और सुरक्षा मानकों की जांच करेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे प्रकरण से स्थानीय स्तर पर भी चिंता का माहौल है। सामाजिक संगठनों ने आश्रमों की नियमित जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
सभी चाइल्ड केयर होम की रिपोर्ट तलब
कोर्ट ने राज्य सरकार से प्रदेश में संचालित सभी चाइल्ड केयर होम और अनाथालयों की संख्या, उनकी वर्तमान स्थिति और हालिया निरीक्षण रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत का रुख स्पष्ट है कि बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और मॉनिटरिंग में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ऐसे शुरू हुआ मामला
दरअसल जून–जुलाई 2024 में युगपुरुष आश्रम में हैजा फैलने से 10 बच्चों की मौत हो गई थी। इसके बाद शासन ने वहां रह रहे 86 बच्चों को सेवाधाम आश्रम शिफ्ट किया। जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच सेवाधाम में 17 बच्चों की मौत हो गई, जिनमें से सात बच्चे 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके थे।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार अधिकांश मौतों का कारण सांस लेने में तकलीफ दर्ज किया गया है। लगातार हो रही मौतों ने आश्रम की व्यवस्थाओं, निगरानी तंत्र और मेडिकल रिस्पांस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और विभागीय स्तर पर भी जांच जारी है।
आश्रम संचालक का बड़ा फैसला
सेवाधाम आश्रम के संचालक सुधीरभाई गोयल ने अब दिव्यांग बालक-बालिकाओं का आश्रम संचालन करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने विभाग को पत्र भेजकर बताया कि भविष्य में वे केवल वृद्ध सेवा कार्य जारी रखेंगे। संचालक का दावा है कि इंदौर से लाए गए बच्चे पहले से गंभीर बीमारियों, कुपोषण और संक्रमण से पीड़ित थे, साथ ही उनका मेडिकल रिकॉर्ड भी अधूरा था।
इन बच्चों की हुई मौत
कविशा (8), हिमानी (13), बबलू (7), संदेश (10), ध्वनि पारुल (12), पवन (16) और खुशी (17), कार्तिक (7), कुमकुम (18), स्वर्णा (12), छोटू उर्फ अटल (18), सुहानी (18), विनीता (18), किरण (19), कृष्णा साहू (19), निहारिका (19), पार्वती (20)। रिकार्ड में अधिकांश मौतों का कारण सांस लेने में तकलीफ दर्ज है।

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