श्योपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कराहल थाना क्षेत्र के खिरखिरी गांव में बीजेपी नेता के पिता के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर विवाद गहरा गया है। आरोप है कि पुलिस ने फरियादी को ही आरोपी बना दिया, जिससे भाजपा नेताओं में नाराजगी बढ़ गई है।
मामला बीजेपी नेता जतिन राजपूत के परिवार से जुड़ा है। आरोप के अनुसार, 3 मार्च को खिरखिरी गांव निवासी बद्री जाटव अपनी पत्नी और कुल्हाड़ी लेकर जतिन राजपूत की क्रेशर साइट पर पहुंचा। बताया जा रहा है कि उसने जतिन राजपूत के पिता ओमप्रकाश राजपूत पर हमला करने की कोशिश की। इस दौरान ओमप्रकाश राजपूत ने विरोध किया और उसे वहां से भगा दिया।
घटना के बाद ओमप्रकाश राजपूत ने कराहल थाने और एसडीओपी बड़ौदा से शिकायत की, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद बद्री जाटव ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन दिया, जिसके आधार पर करीब डेढ़ महीने बाद पुलिस ने ओमप्रकाश राजपूत के खिलाफ मारपीट और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।
इस कार्रवाई को भाजपा नेताओं ने एकतरफा बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। बीजेपी जिला अध्यक्ष Shashank Bhushan और पूर्व विधायक Durgalal Vijay ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पीड़ित पक्ष की शिकायत को नजरअंदाज कर केवल दूसरे पक्ष की सुनवाई की गई।
बीजेपी जिला अध्यक्ष शशांक भूषण ने कहा कि कराहल मंडल के उपाध्यक्ष जतिन राजपूत के पिता पर हमला हुआ था, लेकिन पुलिस ने उल्टा उन्हीं के खिलाफ मामला दर्ज कर दिया। उन्होंने इसे गलत और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
वहीं, एसपी Sudhir Kumar Agrawal ने कहा कि मारपीट और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ है। जांच के दौरान एक वीडियो भी प्रस्तुत किया गया था। जनसुनवाई में मिले आवेदन को एसडीओपी बड़ौदा-कराहल को जांच के लिए भेज दिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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