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उज्जैन में रविवार से शुरू होगी पंचकोशी परिक्रमा, 17 अप्रैल तक चलेगी ऐतिहासिक पंचकोशी यात्रा!

उज्जैन: हर साल वैशाख माह की चिलचिलाती धूप में हजारों ग्रामीण धर्म नगरी उज्जैन की परिक्रमा करने के लिए निकलते हैं. वैशाख महीने में इस परिक्रमा का विशेष महत्व बताया गया है. कई ग्रामीण ऐसे भी हैं, जो नंगे पैर इस यात्रा को पूरा करते हैं. इस साल यह पंचकोशी यात्रा 12 अप्रैल से शुरू होने जा रही है. वहीं, यात्रा शुरू होने के 2 दिन पहले ही श्रद्धालु इसमें शामिल होने उज्जैन पहुंचने लगे हैं.

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन अलर्ट

तपती गर्मी, नंगे पांव और 118 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा, फिर भी भक्तों के चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा दिखाई देती है. पंचकोशी यात्रा के लिए श्रद्धालु अपने साथ 5 दिन के लिए लकड़ी, कंडे, बर्तन, आटा, दाल और तेल सहित अन्य सामान लेकर उज्जैन पहुंच रहे हैं. प्रशासन भी इस यात्रा को लेकर अलर्ट पर है और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए व्यवस्थाएं कर रही है. अलग-अलग सामाजिक संस्थाएं भी पंडाल लगाकर श्रद्धालुओं को खाना, पानी और ठहरने की व्यवस्था कर रहीं हैं.

नागचंद्रेश्वर मंदिर से शुरू होती है पंचकोशी यात्रा

पुजारी अनिमेश शर्माबताते हैं, “मान्यता है कि इसकी शुरुआत सम्राट विक्रमादित्य के समय से हुई थी. तब से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है. श्रद्धालु नगर के चारों द्वारों पर स्थित शिव रूपों में द्वारपाल पिंग्लेश्वर, दुर्दुरेश्वर, कायावरुणेश्वर और बिल्केश्वर महादेव के दर्शन कर भगवान से सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और उत्तम फसल की कामना करते हैं. यहीं से यात्रा शुरू होती है और यहीं नागचंद्रेश्वर मंदिर पर वापस आकर यात्रा पूरी होती है. श्रद्धालु यात्रा पूरी होने पर मंदिर में मिट्टी के घोड़े अर्पित करते हैं.”

7 पड़ाव पर होता है विश्राम

12 अप्रैल से शुरू होकर पंचकोशी यात्रा 16 अप्रैल तक चलेगी. रास्ते में पड़ने वाले 7 पड़ाव पर विश्राम होता है, जिसमें उंडासा, पिंगलेश्वर, शनि मंदिर त्रिवेणी, करोहन, नलवा, अंबोदिया और उप पड़ाव कालियादेह महल पर विश्राम करते हैं. इन पड़ावों पर सेवा भाव से लगे लोग श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पानी और उपचार की व्यवस्था करते हैं. मालवा की परंपरा के अनुसार दाल-बाटी का भोग लगाकर भक्त प्रसाद ग्रहण करते हैं.

कलेक्टर रोशन कुमार सिंहने बताया, “पंचकोशी यात्रा को लेकर सभी व्यवस्थाएं कर ली गई हैं. यात्रा मार्ग पर पानी की व्यवस्था, मार्ग की सफाई, सीसीटीवी कैमरे और लाइट लगा दी गई है. इसके साथ ही यात्रा मार्ग का निरीक्षण कर लिया गया है. मार्ग पर चल रहे पुल-पुलिया के निर्माण स्थल पर बैरिकेडिंग कर दी गई है. यात्रा मार्ग पर अस्थाई शौचालय और मेडिकल की व्यवस्था भी कर दी गई है. इसके साथ ही यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं का सुरक्षा बीमा भी हो रहा है.”

एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि “यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर फोकस किया गया. मार्ग में आने वाले सभी ग्रामीण इलाकों में बैठक की गई है. इसके साथ ही सभी थानों के बल को तैनात किया गया है. यात्रा मार्ग का ड्रोन, सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है. वहीं, ड्यूटी पर तैनात अधिकारी और कर्मचारी अपनी शिफ्ट समाप्त होने पर रिलीवर के आने के बाद ही कर्तव्य स्थल छोड़ें, इसके भी निर्देश दिए गए हैं.”