प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवती सुआ ग्राम की निवासी है और वह लंबे समय से बीमार चल रही थी। जब दवाइयों से आराम नहीं मिला, तो परिजनों ने इलाज के बजाय ओझा-सोखा को अस्पताल परिसर में बुला लिया। इलाज की जगह परिजनों ने झाड़फूंक शुरू कर दी, वो भी अस्पताल जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान के भीतर। इस दौरान न तो अस्पताल प्रशासन ने कोई आपत्ति जताई, और न ही सुरक्षा व्यवस्था ने इस पर कोई रोक लगाई।
इस पूरे मामले पर विधायक प्रतिनिधि (स्वास्थ्य विभाग) अब्दुल सलीम ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब अस्पताल परिसर में झाड़फूंक जैसी घटनाएं हुई हों। उन्होंने कहा कि ऐसे अंधविश्वासी कृत्य केवल मानवता के लिए ही नहीं, बल्कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति के प्रति जनता के भरोसे को भी नुकसान पहुंचाते हैं। जब लोग इलाज के नाम पर झाड़फूंक की ओर मुड़ते हैं, तो इससे समाज में दवाइयों और डॉक्टरों के प्रति अविश्वास बढ़ता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए। साथ ही, आमजन के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण और चिकित्सा जागरूकता फैलाने के लिए ठोस प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
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