उज्जैन। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की बहुप्रतीक्षित ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ का विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन से शुभारंभ हुआ। यात्रा शुरू करने से पहले दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ पार्थिव शिवलिंग का पूजन कर सफलता की कामना की। इस अवसर पर कन्या भोज आयोजित किया गया और साधु-संतों सहित अन्य लोगों को भी भोजन कराया गया।
करीब 950 किलोमीटर लंबी यह पदयात्रा लगभग 70 दिनों में अयोध्या पहुंचकर संपन्न होगी। यात्रा के दौरान प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर पैदल चलने की योजना है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य राजनीतिक लाभ हासिल करना नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मंदिरों में चढ़ावे तथा सोने की चोरी से जुड़ी घटनाओं जैसे मुद्दों पर आवाज उठाना है।
महाकाल दर्शन के बाद शुरू हुआ सफर
यात्रा की शुरुआत चिंतामण गणेश मंदिर में दर्शन के साथ हुई। इसके बाद नृसिंह घाट स्थित बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन किया गया। श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद यात्रा को रवाना किया गया। पहले दिन का पड़ाव कानीपुरा निर्धारित किया गया। उज्जैन शहर में यात्रा विभिन्न प्रमुख मार्गों और बाजारों से होकर गुजरी।
रथ पर विराजमान राम दरबार, पांच नदियों का जल
यात्रा के लिए विशेष रथ तैयार किया गया है, जिस पर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। रथ पर गंगा, यमुना, शिप्रा, कावेरी और नर्मदा नदियों के जल से भरे कलश भी रखे गए हैं। धार्मिक प्रतीकों से सुसज्जित यह रथ यात्रा के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है।
संतों का आशीर्वाद, मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी
आयोजकों के अनुसार, यात्रा के पहले दिन करीब तीन हजार लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। आगे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन एक हजार से 1,500 लोगों के जुड़ने की संभावना जताई गई है। यात्रा को विभिन्न संतों और धर्मगुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त होने की बात कही गई है। महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा सहित कई संत भी इसमें शामिल हैं।
यात्रा में रायसेन से आईं फराह खान जैसी मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी भी चर्चा में रही। फराह खान ने इसे सत्य की लड़ाई बताते हुए कहा कि उन्हें किसी तरह की धमकी नहीं मिली है। इस भागीदारी को धार्मिक सद्भाव और साझा सांस्कृतिक परंपरा के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
लगभग 70 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा धार्मिक स्थलों की पारदर्शिता, आस्था और सनातन परंपराओं से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए अयोध्या पहुंचेगी।

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