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राजसी ठाठ से निकली काल भैरव की सवारी

उज्जैन। जल झूलनी एकादशी यानी डोल ग्यारस के अवसर पर मंगलवार को भगवान महाकाल के सेनापति बाबा काल भैरव की भव्य सवारी राजसी वैभव के साथ नगर भ्रमण पर निकली। चांदी की पालकी में विराजित बाबा के दर्शन के लिए करीब चार किलोमीटर लंबे सवारी मार्ग पर हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े। करीब तीन घंटे तक पूरा मार्ग भक्ति, उल्लास और जयकारों से गूंजता रहा।

सवारी की शुरुआत से पहले दोपहर 3.30 बजे कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने भगवान काल भैरव के रजत मुखारविंद और चरण पादुकाओं का पूजन किया। इसके बाद ग्वालियर से लाई गई सिंधियाशाही राजसी पगड़ी बाबा को धारण कराई गई। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र बल की टुकड़ी ने भगवान काल भैरव को गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

इसके बाद पुलिस बैंड, सशस्त्र बल की टुकड़ी, धार्मिक झांकियों, अखाड़ों के दल और हाथी-घोड़ों के साथ सवारी नगर भ्रमण पर निकली। रास्ते में 50 से अधिक स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर पालकी का स्वागत किया और कई जगह विधि-विधान से पूजन किया।

सिद्धवट पर हुआ पूजन

काल भैरव मंदिर से शुरू हुई सवारी नया बाजार, भैरवगढ़ नाका, माणकचौक और महेंद्र मार्ग होते हुए केंद्रीय जेल तिराहे पहुंची। यहां जेल अधीक्षक ने पालकी का पूजन किया। इसके बाद सवारी पारंपरिक मार्ग से सिद्धवट पहुंची। वैकुंठ द्वार पर पुजारियों ने शिप्रा जल से बाबा काल भैरव और चरण पादुकाओं का पूजन किया।

पूजन के बाद सवारी ब्रजपुरा और जेल तिराहा होते हुए वापस काल भैरव मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। ढोल-नगाड़ों और बाबा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

एक झलक के लिए उमड़ी भीड़

बाबा काल भैरव की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सवारी मार्ग पर घंटों इंतजार करते नजर आए। मंदिर के आसपास पेड़ों, ऊंचे स्थानों और अन्य जगहों पर भी भक्तों की भीड़ जमा रही।

सवारी में श्रद्धालु शिव, शक्ति और गणपति सहित विभिन्न देवी-देवताओं के स्वरूप धारण कर शामिल हुए। कई स्थानों पर पालकी पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने आरती की और पुष्प अर्पित किए। पालकी सामने आते ही भक्त हाथ जोड़कर खड़े हो गए और जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।