जबलपुर। अपराध की सजा काट रहे हाथों ने इस बार भगवान गणेश की ऐसी प्रतिमाएं तैयार की हैं, जो आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस केंद्रीय कारागार, जबलपुर में कैदियों ने प्राकृतिक संसाधनों से 150 ईको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं।
केंद्रीय जेल के उप जेल अधीक्षक मदन कमलेश के अनुसार, अलग-अलग अपराधों में सजा काट रहे करीब एक दर्जन कैदियों ने मिलकर इन प्रतिमाओं का निर्माण किया। प्रतिमाएं बनाने में मिट्टी, तुलसी के बीज और गोबर का इस्तेमाल किया गया है। इन्हें रंगने के लिए भी प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया गया, ताकि विसर्जन के बाद पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
न्यायाधीशों और अधिकारियों ने कराई बुकिंग
कैदियों द्वारा तैयार इन प्रतिमाओं की मांग इतनी रही कि सभी 150 प्रतिमाओं की बुकिंग पहले ही हो चुकी है। न्यायाधीशों और प्रशासनिक अधिकारियों सहित अन्य लोगों ने भी इन प्रतिमाओं को खरीदने में रुचि दिखाई है। जेल में भगवान गणेश की स्थापना के लिए भी एक अलग प्रतिमा तैयार की गई है।
जेल प्रशासन ने प्रतिमाओं के निर्माण के लिए कैदियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए थे। प्रतिमाओं की बिक्री से प्राप्त राशि कैदी कल्याण कोष में जमा की जाएगी। इसके अलावा जिन कैदियों ने प्रतिमाएं तैयार की हैं, उनके घर भी एक-एक प्रतिमा भेजी जा रही है। जेल कर्मचारी भी इन प्रतिमाओं को खरीद रहे हैं।
सजा के बीच सृजन की राह
जेल प्रशासन के मुताबिक इस पहल का उद्देश्य कैदियों को रचनात्मक और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना है, ताकि उनमें आत्मविश्वास पैदा हो और वे भविष्य में समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार हो सकें।
यह पहल बताती है कि सुधार की राह में रचनात्मकता और हुनर भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। जेल की चारदीवारी के भीतर तैयार हुई ये गणेश प्रतिमाएं पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कैदियों के पुनर्वास और बदलाव की कहानी भी कह रही हैं।

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