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उज्जैन में तलवार और भगवा ध्वज के साथ गरबा, युवतियों ने दिखाई भक्ति और शौर्य की शक्ति

उज्जैन। शारदीय नवरात्र के अवसर पर धर्मनगरी उज्जैन में गरबा महोत्सव के दौरान भक्ति, शक्ति और शौर्य का अनूठा संगम देखने को मिला। नानाखेड़ा स्थित राजमाता सिंधिया स्टेडियम में शिव शक्ति सांस्कृतिक समिति की ओर से आयोजित गरबा महोत्सव में युवतियों और महिलाओं ने एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में भगवा ध्वज लेकर पारंपरिक गरबा प्रस्तुत किया। तलवारों के साथ कदमताल करती प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। पंडाल में गूंजते ‘जय श्री राम’ और ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

इस वर्ष महोत्सव की मुख्य थीम मां शक्ति की आराधना और महिषासुर मर्दन रखी गई है। आयोजन के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति, परंपरा और नारी शक्ति के साहस को प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया।

फिल्मी गीतों की जगह भजन और राष्ट्रभक्ति के तराने

शिव शक्ति सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष सतीश सिंदल ने बताया कि समिति के पंडाल में फिल्मी गीतों पर गरबा करने की अनुमति नहीं है। यहां पारंपरिक भजनों, धार्मिक गीतों और राष्ट्रभक्ति से जुड़े गीतों पर ही प्रस्तुतियां दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष ‘आई लव महाकाल’ थीम पर गरबा महोत्सव आयोजित किया गया था, जिसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। इस बार मां शक्ति की आराधना और महिषासुर मर्दन को केंद्र में रखा गया है।

समिति के सचिव गोपाल अग्रवाल के अनुसार, गरबा प्रस्तुतियों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों और महिषासुर वध के प्रसंगों को मंच पर जीवंत रूप में दर्शाया गया। इन प्रस्तुतियों के जरिए धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश भी दिया गया।

‘मुझे चढ़ गया भगवा रंग’ पर दिखाया शौर्य

महोत्सव में युवतियों का तलवार और भगवा ध्वज के साथ गरबा विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। ‘मुझे चढ़ गया भगवा रंग’ और ‘दुनिया में हम फिर से भगवा लहराएंगे’ जैसे ओजस्वी गीतों पर प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ अपनी कला और कौशल का प्रदर्शन किया। तलवारों के साथ सधे हुए कदमों और आत्मविश्वास से भरी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को प्रभावित किया।

इस प्रदर्शन ने महारानी लक्ष्मीबाई और वीरांगना रानी दुर्गावती जैसी ऐतिहासिक वीरांगनाओं के साहस और पराक्रम की यादें भी ताजा कर दीं। पंडाल में मौजूद लोगों ने तालियों और जयकारों के साथ प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया।

‘आज की नारी शक्ति और भक्ति दोनों का प्रतीक’

गरबा प्रस्तुति में शामिल अदिति गेहलोत ने कहा कि तलवार और भगवा ध्वज के साथ गरबा करने का उद्देश्य महिलाओं की शक्ति, साहस और सामर्थ्य को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि आज की नारी कमजोर नहीं है, बल्कि वह हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही है।

अदिति के मुताबिक, नारी शक्ति और भक्ति दोनों का प्रतीक है। इस प्रस्तुति के माध्यम से महिलाओं में आत्मविश्वास जगाने और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का संदेश देने का प्रयास किया गया। उज्जैन का यह गरबा महोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और नारी शक्ति के उत्सव के रूप में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।