सीहोर/भोपाल। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने इस मामले में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामला राज्य वन विकास निगम की ओर से की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़ा है।
आयोग ने मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, वन विभाग के प्रमुख सचिव, सीहोर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर आयोग संबंधित अधिकारियों को समन जारी कर सकता है।
12 मकान तोड़े जाने से प्रभावित हुए आदिवासी परिवार
कोसमी गांव में 11 अक्टूबर को हुई कार्रवाई के दौरान आदिवासी परिवारों के 12 मकान तोड़े गए थे। मकानों के टूटने और फसलों को नुकसान पहुंचने से प्रभावित परिवारों के सामने आवास और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। मामला सामने आने के बाद इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठने लगे।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि उनके क्षेत्र में अन्याय की पराकाष्ठा हुई है। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
शिवराज सिंह चौहान ने मौके पर पहुंचकर जताई नाराजगी
कार्रवाई के बाद शिवराज सिंह चौहान प्रभावित परिवारों से मिलने कोसमी गांव पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि लोगों के पुराने मकान गिरा दिए गए, फसलें बर्बाद कर दी गईं और कुओं को भी मिट्टी से भर दिया गया। उन्होंने कार्रवाई को शर्मनाक बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
शिवराज सिंह चौहान ने इस बात पर भी नाराजगी जताई थी कि कार्रवाई के दौरान वन विकास निगम और प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था। उन्होंने मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से फोन पर बात कर मामले की जानकारी दी थी।
उन्होंने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया था कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा और गरीबों को बेघर करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई जाएगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मांगी जांच रिपोर्ट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मामला उनके संज्ञान में आया है और उन्होंने मुख्य सचिव को इसकी जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई, संबंधित अधिकारियों ने किन नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया तथा प्रभावित परिवारों की शिकायतों पर क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
वन विकास निगम ने बताया अतिक्रमण हटाने का मामला
दूसरी ओर, राज्य वन विकास निगम के अधिकारियों ने कार्रवाई को नियमानुसार बताया है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित सरकारी भूमि वर्ष 2021 में पौधरोपण के लिए राज्य वन विकास निगम को आवंटित की गई थी। उनका दावा है कि आवंटन के समय भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं था।
अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2022 के बाद कुछ लोगों ने पौधरोपण को नुकसान पहुंचाकर भूमि पर अतिक्रमण करना शुरू किया। इस संबंध में संबंधित लोगों को नोटिस भी दिए गए थे। अधिकारियों का कहना है कि नोटिस के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई।
आयोग की कार्रवाई के बाद बढ़ी जवाबदेही
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद अब राज्य सरकार और संबंधित विभागों को कार्रवाई के आधार, प्रक्रिया और प्रभावित परिवारों की स्थिति के संबंध में जवाब देना होगा। मामले में आयोग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेज और राज्य सरकार की जांच रिपोर्ट आगे की कार्रवाई की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल, एक ओर वन विकास निगम कार्रवाई को सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया बता रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवारों की स्थिति और कार्रवाई को लेकर उठे सवालों की जांच की जा रही है। अब सबकी नजर आयोग के समक्ष पेश किए जाने वाले जवाब और प्रशासनिक जांच के निष्कर्षों पर है।

More Stories
डॉ. ढाल सिंह बिसेन बने उत्तराखंड के नए राज्यपाल, मध्य प्रदेश की राजनीति में चार दशक से अधिक का सफर
शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय बने मध्य प्रदेश वॉलीबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष
सागर में वन विभाग की टीम पर हमला, डिप्टी रेंजर गंभीर घायल; ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश