उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी के पवित्र रामघाट पर नाजिया खान द्वारा अपने पूर्वजों के लिए तर्पण और पिंडदान किए जाने का मामला चर्चा में है। उन्होंने बकरीद के दौरान काटे गए जानवरों की मुक्ति के लिए भी धार्मिक अनुष्ठान करने की बात कही। यह अनुष्ठान पंडित अजय जोशी के मार्गदर्शन और मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ।
तर्पण के बाद मीडिया से बातचीत में नाजिया खान ने अपने धार्मिक विचारों और जीवन में आए बदलावों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि 35 वर्ष की उम्र में लिया गया यह निर्णय उनके जीवन का सबसे खूबसूरत फैसला है। उन्होंने अपनी पूर्व धार्मिक मान्यताओं पर सवाल उठाते हुए इस्लाम से जुड़े कुछ मुद्दों पर अपनी व्यक्तिगत राय रखी।
नाजिया खान ने कहा कि वह ऐसे धार्मिक विषयों को समझना चाहती हैं, जिनसे उन्हें अपने पूर्वजों और पारिवारिक परंपराओं के बारे में जानकारी मिल सके। उन्होंने इस्लामिक धार्मिक ग्रंथों में पैगंबर मोहम्मद के माता-पिता और पूर्वजों के उल्लेख को लेकर भी सवाल उठाए। उनके इन बयानों पर धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा होने की संभावना है।
तर्पण को लेकर रखे अपने विचार
तर्पण की परंपरा पर अपनी बात रखते हुए नाजिया खान ने सवाल किया कि जब अलग-अलग धर्मों के लोग अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए तीर्थस्थलों पर जाते हैं, तो मुस्लिम व्यक्ति के ऐसा करने पर सवाल क्यों उठने चाहिए? उन्होंने गया जी सहित विभिन्न तीर्थस्थलों पर पूर्वजों के लिए किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों का उल्लेख किया।
धर्म परिवर्तन को लेकर लगाए जा रहे कयास
नाजिया खान ने सनातन धर्म अपनाने की संभावना को लेकर भी संकेत दिए। उनके बयान के बाद उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने धर्म परिवर्तन की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में उनके भविष्य के निर्णय को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।

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