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दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से निकालेंगे ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’, उज्जैन से अयोध्या तक 930 किमी पैदल चलेंगे

उज्जैन। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू करेंगे। विजयादशमी के दिन शुरू होने वाली यह यात्रा उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर करीब 930 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए अयोध्या पहुंचेगी। यात्रा को करीब 70 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

दिग्विजय सिंह ने इससे पहले 2017 में विजयादशमी के दिन ही नर्मदा परिक्रमा शुरू की थी। इस बार भी उन्होंने यात्रा की शुरुआत के लिए विजयादशमी का दिन चुना है। यात्रा के दौरान वे प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे। इसकी तैयारी के लिए वे रोज लगभग 8 किलोमीटर पैदल अभ्यास कर रहे हैं।

चिंतामन गणेश के दर्शन के बाद शुरू होगा सफर

यात्रा से एक दिन पहले 19 अक्टूबर की रात दिग्विजय सिंह उज्जैन पहुंचेंगे। 20 अक्टूबर की सुबह वे सबसे पहले चिंतामन गणेश मंदिर में दर्शन करेंगे। इसके बाद बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग निर्माण का कार्यक्रम है। महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के बाद दोपहर करीब 2 बजे यात्रा शुरू होने की योजना है।

उज्जैन जिले में यात्रा करीब पांच दिन रहेगी। पहला पड़ाव कानीपुरा में होगा। इसके बाद सिंदुरिया, तराना और कनासिया होते हुए यात्रा शाजापुर जिले में प्रवेश करेगी। आगे यह मध्य प्रदेश के कई जिलों से होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचेगी और अयोध्या में रामलला के दर्शन के साथ यात्रा के समापन की योजना है।

‘यतो धर्मस्ततो जयः’ रखा गया यात्रा का ध्येय वाक्य

यात्रा का ध्येय वाक्य ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ रखा गया है। आयोजकों के अनुसार यात्रा में सत्य, सेवा, करुणा, समानता और सामाजिक सद्भाव जैसे विषयों पर लोगों से संवाद किया जाएगा। यात्रा को गैर-राजनीतिक रखने की बात कही गई है। इसमें करीब 3 हजार लोगों के शामिल होने की तैयारी है।

सनातन धर्म और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे उठाने की बात

दिग्विजय सिंह ने यात्रा से पहले जारी वीडियो में इसके उद्देश्य बताए हैं। उन्होंने कहा है कि यात्रा के दौरान सनातन धर्म की मूल अवधारणा पर चर्चा की जाएगी। साथ ही राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे से जुड़े सवालों तथा RSS, VHP और भाजपा की भूमिका को लेकर अपने आरोप भी उठाने की बात कही है। अयोध्या पहुंचकर इन मुद्दों को लेकर याचिका दायर करने की बात भी उन्होंने कही है। ये दिग्विजय सिंह द्वारा लगाए गए आरोप हैं।

दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में ‘हिंदू’ शब्द को लेकर भी टिप्पणी की है। उनका दावा है कि यह शब्द वेद, उपनिषद और पुराणों में नहीं मिलता। इस बयान को लेकर भाजपा और संत समाज की ओर से विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

दिग्विजय सिंह ने अपनी उम्र को लेकर कहा कि यदि 80 की उम्र में भी वे खुद को 50 साल का महसूस करते हैं, तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। करीब 930 किलोमीटर की यह पदयात्रा धार्मिक आस्था, सनातन धर्म की व्याख्या और उससे जुड़े राजनीतिक विमर्श के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।