भोपाल। मध्य प्रदेश के नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ, आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। परिवहन विभाग की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ 25 सितंबर 2026 को किया जाएगा। भोपाल के दशहरा मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुरुआती चरण में 351 बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
सरकार के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न शहरों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करना, रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। योजना के तहत प्रदेश में लगभग 1500 बसों के संचालन की शुरुआत की जाएगी।
इंटरसिटी और इंट्रासिटी श्रेणी में चलेंगी बसें
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुरुआती चरण में 351 बसों को दो श्रेणियों में संचालित किया जाएगा। इनमें 120 इंटरसिटी बसें होंगी, जो दो या उससे अधिक शहरों के बीच यात्रियों को परिवहन सुविधा देंगी।
वहीं 231 इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर संचालित होंगी। इनसे स्थानीय यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की योजना है।
इन 7 शहरों से शुरू होगा पहला चरण
पहले चरण में प्रदेश के सात शहरों से 351 बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इनमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल हैं।
शहरवार बसों का विवरण इस प्रकार है—
- इंदौर: 145 बसें — 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी
- भोपाल: 106 बसें — 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी
- जबलपुर: 67 बसें — 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी
- रीवा: 18 इंटरसिटी बसें
- देवास: 10 इंटरसिटी बसें
- कटनी: 3 इंटरसिटी बसें
- भिंड: 2 इंटरसिटी बसें
2031 तक 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को केवल शहरों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। योजना के तहत वर्ष 2031 तक प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार की योजना प्रदेशभर में करीब 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित करने की है। इससे प्रतिदिन 30 लाख से अधिक यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलने का दावा किया गया है। इसके साथ ही 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड, टर्मिनल और डिपो के कायाकल्प की योजना भी है।
इलेक्ट्रिक बसों पर रहेगा जोर
सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए योजना में इलेक्ट्रिक बसों और स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करना और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है।
ITMS से होगी बसों की रियल टाइम निगरानी
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत चलने वाली बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के जरिए की जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) और उसकी सात सहायक कंपनियों में कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं।
इन केंद्रों से बसों की लोकेशन, संचालन और समयबद्धता समेत अन्य गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी की जाएगी।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर फोकस
नई बस सेवा में महिला और बाल सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। सभी बसों को 7 CCTV कैमरों, पैनिक बटन और रियल टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग (VLTD) सिस्टम से लैस किया जा रहा है।
इसके अलावा बसों में पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (PIS), ड्राइवरों की तकनीकी ट्रेनिंग और त्वरित शिकायत निवारण व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
PPP मॉडल से बढ़ेगा निजी क्षेत्र का योगदान
योजना में जन-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल को भी बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार के अनुसार पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए निजी बस ऑपरेटरों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।
इसके माध्यम से विज्ञापन और कार्गो जैसी गैर-किराया आय बढ़ाने के साथ आधुनिक डिपो और टर्मिनल सुविधाओं के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश के अवसर
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के विस्तार से बस संचालन के साथ-साथ वाहन निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सेवाओं और परिवहन से जुड़े अन्य क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है। इससे युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना है।

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