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Ujjain; तेजा दशमी पर विष्णुपुरा में उमड़ा आस्था का सैलाब, भव्य बिंदौरी में गूंजे तेजाजी महाराज के जयकारे

उज्जैन। तेजा दशमी के अवसर पर विष्णुपुरा स्थित प्राचीन श्री वीर तेजाजी धाम में आयोजित तीन दिवसीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का श्रद्धा और उत्साह के साथ समापन हुआ। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान वीर तेजाजी महाराज के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।

डॉ. भवानी शंकर शास्त्री ने बताया कि तीन दिवसीय आयोजन की शुरुआत रात्रि जागरण से हुई। इसके बाद दूसरे दिन मंदिर परिसर से भव्य बिंदौरी चल समारोह निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। ढोल-ताशों की थाप, डीजे की धुन और तेजाजी महाराज के जयकारों से विष्णुपुरा का वातावरण भक्तिमय हो गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बड़े भाई एवं समाजसेवी नारायण यादव उपस्थित रहे। मंदिर परिसर में विशेष पूजन-अर्चन के साथ महाआरती का आयोजन किया गया। इस दौरान डॉ. भवानी शंकर शास्त्री के शरीर में तेजाजी महाराज का भाव आने तथा पारंपरिक रूप से जीवित नाग के दर्शन का दृश्य श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र रहा। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर में मौजूद रहे।

जगह-जगह हुआ बिंदौरी का स्वागत

भव्य बिंदौरी मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर विष्णुपुरा के प्रमुख मार्गों और बस्तियों से होकर गुजरी। रास्ते में स्थानीय रहवासियों ने स्वागत मंच लगाकर पुष्पवर्षा की और आरती उतारी। श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह प्रसादी का वितरण भी किया गया।

बिंदौरी में शामिल श्रद्धालुओं ने भगवान तेजाजी महाराज को नारियल, कच्चा दूध और बाजरी का भोग अर्पित किया। इस दौरान क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की गई।

आज भी कायम है वर्षों पुरानी लोक परंपरा

मालवा अंचल में लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। तेजा दशमी के अवसर पर तांती यानी रक्षा-सूत्र बांधने और मन्नत उतारने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। स्थानीय मान्यता के अनुसार तांती बांधने से सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति को राहत मिलती है।

विष्णुपुरा स्थित तेजाजी धाम में यह परंपरा आज भी श्रद्धा और लोक-संस्कृति के साथ निभाई जा रही है। तेजा दशमी के अवसर पर निकली भव्य बिंदौरी में धार्मिक आस्था के साथ मालवा की लोक परंपरा और संस्कृति का भी अनूठा संगम देखने को मिला। तीन दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने भाग लिया।