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महाकाल मंदिर में AI से बना कथित फर्जी दर्शन पास पकड़ा गया, तीन युवक हिरासत में!

उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में तकनीक के दुरुपयोग का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कथित तौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित टूल की मदद से तैयार किए गए फर्जी दर्शन पास के जरिए गर्भगृह में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे तीन युवकों को सुरक्षा कर्मियों ने पकड़ लिया। जांच के दौरान पास पर मौजूद क्यूआर कोड स्कैन किया गया तो पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया। इसके बाद मंदिर समिति की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

QR कोड स्कैन होते ही सामने आया सच

पुलिस के अनुसार, भोपाल के कोलार रोड निवासी भरत उइके (20) अपने दो नाबालिग साथियों के साथ मंगलवार सुबह महाकाल मंदिर पहुंचे थे। तीनों के मोबाइल फोन में गर्भगृह दर्शन का डिजिटल पास मौजूद था। शीघ्र दर्शन लाइन से प्रवेश के दौरान निजी सुरक्षा कंपनी के सुरक्षा अधिकारी मनोजकरण राजपूत को पास संदिग्ध लगा।

संदेह होने पर मंदिर समिति के कंप्यूटर ऑपरेटर से पास का QR कोड स्कैन कराया गया। स्कैनिंग के दौरान पता चला कि पास मंदिर के आधिकारिक रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं था। इसके बाद तीनों युवकों को तत्काल रोक लिया गया।

पहली नजर में बिल्कुल असली लग रहा था पास

जांच में सामने आया कि कथित फर्जी पास में क्यूआर कोड, आधार फोटो, नाम, मोबाइल नंबर, विजिट टाइप, भुगतान संबंधी विवरण, ट्रांजेक्शन आईडी, रजिस्ट्रेशन नंबर, तारीख, समय और गेट नंबर जैसी सभी जानकारियां दर्ज थीं। दस्तावेज देखने पर वह वास्तविक पास जैसा ही प्रतीत हो रहा था, लेकिन तकनीकी सत्यापन में उसकी असलियत उजागर हो गई।

मंदिर समिति की शिकायत पर दर्ज हुआ केस

सुरक्षा कर्मियों ने तीनों युवकों को सहायक प्रशासक शिवकांत पांडेय के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके बाद मंदिर समिति के कर्मचारी कुलदीप सिंह की शिकायत पर महाकाल थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी पास किसने तैयार किया, किस तकनीक का इस्तेमाल हुआ और इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह तो सक्रिय नहीं है।

गर्भगृह प्रवेश बंद होने से हुआ संदेह

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि पास गर्भगृह प्रवेश के लिए बनाया गया था, जबकि महाकाल मंदिर के गर्भगृह में सामान्य श्रद्धालुओं का प्रवेश लंबे समय से प्रतिबंधित है। इसी तथ्य ने सुरक्षा कर्मियों का संदेह बढ़ाया और जांच के दौरान पूरा मामला उजागर हो गया।

तकनीक का दुरुपयोग बना चिंता का विषय

यह घटना बताती है कि आधुनिक AI और डिजिटल टूल्स का गलत इस्तेमाल कर सरकारी अथवा संस्थागत दस्तावेजों की नकल करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, इस मामले में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और डिजिटल सत्यापन प्रणाली ने समय रहते फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर दिया।