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15 साल पुराने आय से अधिक संपत्ति मामले में बड़ा फैसला, पूर्व परिवहन निरीक्षक को 4 साल की सजा

उज्जैन में आय से अधिक संपत्ति के करीब 15 साल पुराने मामले में विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन परिवहन निरीक्षक सेवाराम खांडेकर को दोषी ठहराते हुए चार साल के सश्रम कारावास और 60 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर उन्हें एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत का फैसला सुनाए जाने के बाद आरोपी को तत्काल केंद्रीय भैरवगढ़ जेल भेज दिया गया।

2011 में लोकायुक्त ने मारा था छापा

मामला वर्ष 2011 का है। लोकायुक्त पुलिस की टीम ने 11 नवंबर 2011 को सेवाराम खांडेकर के उज्जैन स्थित अलकनंदा नगर के मकान पर छापामार कार्रवाई की थी। तलाशी के दौरान लोकायुक्त टीम को बड़ी मात्रा में नकदी, जेवरात और अन्य महंगी वस्तुएं मिली थीं।

जांच आगे बढ़ने पर अधिकारियों ने सेवाराम की आय और उनके नाम से सामने आई संपत्तियों तथा खर्च का मिलान किया। जांच में उनकी वैध आय करीब 27.37 लाख रुपये आंकी गई, जबकि संपत्ति और खर्च का कुल मूल्य 1.84 करोड़ रुपये से अधिक पाया गया।

लोकायुक्त के मुताबिक यह राशि उनकी ज्ञात आय की तुलना में करीब 572 प्रतिशत अधिक थी। इसी आधार पर उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई।

तीन साल बाद दाखिल हुई चार्जशीट

लोकायुक्त पुलिस ने लंबी जांच के बाद 30 अगस्त 2014 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई। गवाहों के बयान, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर करीब 12 साल तक अदालत में सुनवाई चली।

लंबे ट्रायल के बाद विशेष भ्रष्टाचार निवारण अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सेवाराम खांडेकर को दोषी माना और चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

60 लाख का जुर्माना भी

अदालत ने दोषी पर 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आदेश के अनुसार जुर्माना अदा नहीं करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। फैसला सुनाए जाने के बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर केंद्रीय भैरवगढ़ जेल भेज दिया।

लोकायुक्त की ओर से प्रभावी पैरवी

मामले में लोकायुक्त संगठन की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज पाठक और डीडीपी संजय मीणा ने पक्ष रखा। अभियोजन की ओर से मामले से जुड़े साक्ष्यों और दस्तावेजों को अदालत के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।

15 साल पहले शुरू हुई कार्रवाई का यह मामला अब अदालत के फैसले तक पहुंचा है। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद पूर्व परिवहन निरीक्षक को जेल और जुर्माने की सजा भ्रष्टाचार के मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया की लंबी लेकिन महत्वपूर्ण यात्रा को भी सामने लाती है।